तमिलनाडु में इलेक्ट्रिक बसों की तादाद बढ़ रही है। फोटो: शैलेष 
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भारत का ई-सफर: संशोधित ईवी नीति का असर, तमिलनाडु में 2025 तक इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण तेज

कॉप26 के नेट-जीरो लक्ष्य और ईवी-2030 विजन के बीच तमिलनाडु की नई ईवी नीति से दोपहिया, तिपहिया और कारों के पंजीकरण में उछाल, राज्य से देश के कुल ईवी उत्पादन का 40% से अधिक योगदान

Anil Ashwani Sharma

‘‘मानव को अपने ज्ञान का उपयोग इस प्रकार करना होगा कि वह शिल्पकार की तरह परिणामों को आकार न दे बल्कि उपयुक्त वातावरण प्रदान करके विकास को बढ़ावा दे। ठीक उसी तरह जैसे माली अपने पौधों के लिए करता है।’’ 1974 में नोबेल पुरस्कार विजेता फ्रेडरिक वॉन हायेक ने अपने भाषण में लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नीति बनाने की जटिलता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करने के लिए यह बात कही थी। तमिलनाडु की इलेक्ट्रिक वाहन नीति इसका एक सटीक उदाहरण है। विश्व इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति के मुहाने पर खड़ा है। कॉप21 के तहत निर्धारित राष्ट्रीय योगदान ( आईएनडीसी) के अनुसार कार्बन उत्सर्जन को कम करने और तेल पर निर्भरता घटाने के भारत के संकल्प ने इलेक्ट्रिक वाहनों को सक्रिय रूप से अपनाना अनिवार्य बना दिया है।

ध्यान रहे कि तमिलनाडु के चेन्नई शहर को एशिया में इलेक्ट्रिक वाहनों का डेट्रॉइट कहा जाता है। केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के अनुसार तमिलनाडु धीरे-धीरे इलेक्ट्रीक वीकल्स के निर्माण का हब बनते जा रहा है। देश में कुल बिकने वाले ईवी का 40 प्रतिशत इसी राज्य से आता है।

कॉप26 एक ऐतिहासिक क्षण था जब भारत ने 2070 तक नेट जीरो हासिल करने की प्रतिबद्धता जताई और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ईवी 2030 का का लक्ष्य घोषित किया। इसके अनुसार 2030 तक नव पंजीकृत निजी कारों में से 30, बसों में से 40, वाणिज्यिक कारों में से 70 और दोपहिया एवं तिपहिया वाहनों में से 80 प्रतिशत इलेक्ट्रिक होंगे। इस संबंध में भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन जीरो एमिशन ट्रकिंग (सीओईजेडईटी) विभाग में कार्यरत प्रोफेसर प्रोफेसर सीएस शंकर राम ने डाउन टू अर्थ से कहा कि हमारी सरकार ने हमारे देश के लिए यही एक सही लक्ष्य तय किया है। 

इलेक्ट्रिक वाहनों में राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है और इसी लक्ष्य के साथ तमिलनाडु सरकार ने 2019 में अपनी पहली इलेक्ट्रिक वाहन नीति शुरू की थी। वाहन पोर्टल के आंकड़ों से पता चलता है कि 2022 में राज्य में पंजीकृत वाहनों में से केवल 3.9 प्रतिशत ही इलेक्ट्रिक वाहन थे, जबकि 2021 में यह संख्या मात्र 2 प्रतिशत थी। इसका एक मुख्य कारण यह था कि नीति में कर छूट और पंजीकरण शुल्क जैसी गैर-वित्तीय मांग-पक्षीय प्रोत्साहनों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया था जबकि वाहन खरीद के लिए अग्रिम पूंजी सब्सिडी का अभाव था। 

राज्य सरकार ने विद्युतीकरण की निम्न दर को सुधारने के लिए सक्रिय कदम उठाते हुए 2021 में नीति में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की ताकि 2019 की नीति की कमियों को दूर किया जा सके। ध्यान रहे कि साल 2019 में तमिलनाडु सरकार ने जब ईवी नीति लागू की थी, जिसके तहत दोपहिया, तीनपहिया, कार, बस और कमर्शियल वाहनों समेत सभी इलेक्ट्रिक वाहनों को दिसंबर 2022 तक 100 प्रतिशत रोड टैक्स से छूट दी गई थी।

बाद में राज्य सरकार ने इस छूट को बढ़ाते हुए जनवरी 2023 से दिसंबर 2025 तक ईवी वाहनों के लिए मोटर टैक्स पूरी तरह माफ कर दिया और अब इसे बढ़ा कर दिसंबर 2027 तक कर दिया गया है।इसका नतीता है कि    

तमिलनाडु देश के कुल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का 50 प्रतिशत से ज्यादा और कुल ईवी उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा तैयार करता है। इसी वजह से यह राज्य भारत का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मैन्युफैक्चरिंग हब बन चुका है।

डेट्रॉइट रीजनल पार्टनरशिप के नेतृत्व में प्रमुख आर्थिक विकास पहल ग्लोबल एपिसेंटर ऑफ मोबिलिटी के अनुसार मिशिगन का वाहन अनुसंधन एवं विकास (आरऐंडडी) में वार्षिक निवेश 13.2 अरब डॉलर है। इसके विपरीत भारतीय वाहन उद्योग का प्रत्यक्ष घरेलू आरऐंडडी व्यय काफी कम है। मगर अब इसमें बदलाव के संकेत दिख रहे हैं। इन्वेस्ट इंडिया के आंकड़ों से पता

चलता है कि वाहन इंजीनियरिंग और आरऐंडडी पर वैश्विक स्तर पर खर्च किए गए 31 अरब डॉलर में से लगभग 40 फीसदी भारत में स्थापित वैश्विक दक्षता केंद्रों (जीसीसी) को आउटसोर्स किया गया है। बहरहाल चेन्नई की उपलब्धियों को देखते हुए एक उद्योग विशेषज्ञ सुशील मेहता कहते हैं, ‘‘यह शहर अब एशिया का डेट्रॉइट नहीं बल्कि दुनिया का चेन्नई बन चुका है।’’ 

सभी श्रेणियों के कुल इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकरण

2023: 90,305
2024: 1, 33,710
2025: 1,74,477

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इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का पंजीकरण

(2023-2025):
चेन्नई: 13,630, 15,395,
कोयंबटूर: 7,737, 14,265,
तिरुपुर: 5,530, 12,230।
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इलेक्ट्रिक कारों का पंजीकरण
(2023-2025)

चेन्नई: 1,943, 6,307,
कोयंबटूर: 906, 3,575
चेंगलपट्टू: 662, 2,294।
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इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों का पंजीकरण
(2023-2025)

चेन्नई: 1,136, 2,414
मदुरै: 50, 1183