भारत की 96 फीसदी आबादी यानी 133 करोड़ लोग ऐसी हवा में सांस लेने को मजबूर हैं जहां पीएम 2.5 का वार्षिक औसत स्तर डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी मानकों से सात गुणा खराब है; फोटो: आईस्टॉक 
वायु

प्रदूषण की राजधानी बना गुरुग्राम, दिल्ली-गाजियाबाद में भी स्थिति 'बेहद खराब'

20 जनवरी 2026 को 243 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है

Lalit Maurya

  • गुरुग्राम में वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक है, जहां एक्यूआई 394 तक पहुंच गया है। दिल्ली और गाजियाबाद में भी हालात बेहद खराब हैं।

  • गुरुग्राम की हवा में पीएम2.5 कणों की अधिकता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

  • गुरुग्राम में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,400 फीसदी अधिक है।

  • दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 32 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में गुरुग्राम की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 11 गुणा खराब है।

  • 20 जनवरी 2026 को 243 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 30 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 67.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

  • फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 262 रिकॉर्ड किया गया है।  

  • आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गाजियाबाद (393) दूसरे जबकि नोएडा (382) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 378 अंकों के साथ दिल्ली चौथे स्थान पर है। धारूहेड़ा-ग्रेटर नोएडा में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 373 और 372 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

  • नारनौल (354) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में भिवाड़ी (342), चरखी दादरी (339) और मानेसर (328) भी शामिल हैं।

  • आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के तीन शहर (गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा) और हरियाणा के पांच शहर (गुरुग्राम, धारूहेड़ा, नारनौल, चरखी दादरी, मानेसर) शामिल हैं।

विश्लेषण से पता चला है कि 20 जनवरी 2026 को देश में गुरुग्राम की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 394 रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले 19 जनवरी को गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता सूचकांक 379 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 15 अंकों का उछाल आया है। हालांकि इसके बावजूद वहां वायु गुणवत्ता अभी भी बेहद खराब बनी हुई है।           

रुझानों में सामने आया है कि गुरुग्राम की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। 

गुरुग्राम में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,400 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 32 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में गुरुग्राम की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 11 गुणा खराब है।

गौरतलब है कि कल देश में गाजियाबाद की हवा सबसे खराब थी, जब एक्यूआई बढ़कर 425 तक पहुंच गया था। हालांकि आज इसमें 32 अंकों का सुधार दर्ज किया गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता गंभीर से बेहद खराब हो गई है।

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से भले ही प्रदूषण में गिरावट आई है, लेकिन दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी बेहद खराब है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 410 दर्ज किया गया था। हालांकि 20 जनवरी को 32 अंकों के सुधार के साथ दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 378 पर पहुंच गया है। इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।     

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 20 जनवरी 2026 को 243 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

वहीं 30 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 67.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 22 फीसदी से अधिक की गिरावट आइ है। इसी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 8.8 फीसदी की कमी दर्ज की गई। दूसरी तरफ मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 3.8 फीसदी का इजाफा हुआ है। खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 36.7 फीसदी का इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है। बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 20 फीसदी की गिरावट आई है।     

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 262 रिकॉर्ड किया गया है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गाजियाबाद (393) दूसरे जबकि नोएडा (382) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 378 अंकों के साथ दिल्ली चौथे स्थान पर है। धारूहेड़ा-ग्रेटर नोएडा में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 373 और 372 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

नारनौल (354) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में भिवाड़ी (342), चरखी दादरी (339) और मानेसर (328) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के तीन शहर (गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा) और हरियाणा के पांच शहर (गुरुग्राम, धारूहेड़ा, नारनौल, चरखी दादरी, मानेसर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गुरुग्राम, नोएडा, दिल्ली, धारूहेड़ा, नारनौल, भिवाड़ी, चरखी दादरी, मानेसर, सिंगरौली, कैथल, जींद, बीकानेर, विशाखापत्तनम, बुलंदशहर, कोल्लम, आसनसोल, छपरा, बालासोर, कोलकाता, मुजफ्फरनगर, फरीदाबाद, रोहतक, ग्वालियर, मेरठ, करनाल, टोंक, बारीपदा, बागपत, मंडी गोबिंदगढ़, समस्तीपुर, सवाई माधोपुर, बिहार शरीफ, पीथमपुर, जयपुर, सीकर, हापुड़, मंडीखेड़ा, कुरुक्षेत्र, नागौर, फतेहाबाद, दुर्गापुर, गुम्मिडीपूंडी, यमुना नगर, राजमहेंद्रवरम, भिवानी, हल्दिया, ब्यासनगर, कोटा, बैरकपुर, वातवा, बक्सर, हाजीपुर, चुरू, झालावाड़, झुंझुनू, बहादुरगढ़, लखनऊ, उज्जैन, मंडीदीप, सहरसा, चित्तौड़गढ़, प्रयागराज, नाहरलागुन, सिरसा, धौलपुर, चंडीगढ़, जालोर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, हावड़ा, धनबाद, कानपुर, गुवाहाटी, आगरा, वाराणसी, पटना, बेगूसराय, सिवान, औरंगाबाद (बिहार), तिरुवनंतपुरम, ब्रजराजनगर, चंद्रपुर, भुवनेश्वर, पटियाला, श्री गंगानगर, अलवर, अंकलेश्वर, सिलीगुड़ी, अहमदाबाद, बद्दी, राउरकेला, हिसार, जैसलमेर, नागपुर, रतलाम, बारबिल, कुंजेमुरा, भागलपुर, खन्ना, पलवल, इंदौर, जलगांव, मुरादाबाद, रामनगर, तुमडीह, नांदेड़, रायपुर, भरतपुर, बेंगलुरु, कल्याण, नयागढ़, धुले, बाड़मेर, परभनी, उदयपुर, धारवाड़, जालंधर, प्रतापगढ़, भिवंडी आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 2.9 फीसदी यानी महज सात शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बागलकोट, चिक्कमगलुरु, कोल्हापुर, मदिकेरी, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर  आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 73 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें देवास, डिंडीगुल, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, हुबली, हैदराबाद, झांसी, कलबुर्गी, कन्नूर, काशीपुर, किशनगंज, कोहिमा, कोप्पल, कोरबा, मदुरै, महाड, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पुडुचेरी, पुडुकोट्टई, रायरंगपुर, रामनाथपुरम, रूपनगर, सागर, सांगली, सासाराम, सतना आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 110 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंकलेश्वर, अररिया, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बहादुरगढ़, बारबिल, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तौड़गढ़, चुरू, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दौसा, देहरादून, धारवाड़, धौलपुर, धुले, एलूर, गांधीनगर, गया, गुवाहाटी, हाजीपुर, हिसार, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खन्ना, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मालेगांव, मंडीदीप, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नयागढ़, पाली, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, परभनी, पटियाला, पटना, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजगीर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सहरसा, सिलीगुड़ी, सिरसा, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, तिरुवनंतपुरम, तुमकुरु, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, वाराणसी, वातवा शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 41 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में आसनसोल, बागपत, बालासोर, बारीपदा, भिवानी, बिहार शरीफ, बीकानेर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, छपरा, कटक, धनबाद, दुर्गापुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हल्दिया, हापुड़, हावड़ा, जयपुर, जींद, कैथल, करनाल, कोलकाता, कोल्लम, कुरुक्षेत्र, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नागौर, पीथमपुर, राजमहेंद्रवरम, रोहतक, समस्तीपुर, सवाई माधोपुर, सीकर, टोंक, विशाखापत्तनम, यमुना नगर शामिल हैं।

वहीं अंगुल, भिवाड़ी, चरखी दादरी, दिल्ली, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मानेसर, नारनौल, नोएडा, सिंगरौली में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 243 में से महज सात शहरों में हवा 'बेहतर' है। 73 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 19 जनवरी 2026 को भी यह आंकड़ा 80 दर्ज किया गया था।

110 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज गुरुग्राम (394) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। आंकड़ों के मुताबिक वहां कल से प्रदूषण में 15 अंकों का उछाल आया है। हालांकि गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता अभी भी बेहद खराब बनी हुई है।           

दिल्ली में भी आज स्थिति बेहद खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 378 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल दिल्ली में एक्यूआई बढ़कर 410 तक पहुंच गया था। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में सुधार आया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 2,300 फीसदी अधिक खराब है।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में उछाल आया है, जहां सूचकांक 262 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता अभी भी खराब श्रेणी में है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 20 जनवरी को दिल्ली चौथे स्थान पर है, वहीं गाजियाबाद (393) दूसरे, जबकि नोएडा (382) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 258, गाजियाबाद में 393, गुवाहाटी में 171, गुरूग्राम में 394, नोएडा में 382, ग्रेटर नोएडा में 372 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 94 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 185, चेन्नई में 130, चंडीगढ़ में 163, हैदराबाद में 83, जयपुर में 238 और पटना में 157 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन सात शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, चिक्कमगलुरु, कोल्हापुर, मदिकेरी, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, आरा, बदलापुर, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बठिंडा, बेलापुर, बेलगाम, भिलाई, बोइसर, चामराजनगर, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, दावनगेरे, देवास, डिंडीगुल, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, हुबली, हैदराबाद, झांसी, कलबुर्गी, कन्नूर, काशीपुर, किशनगंज, कोहिमा, कोप्पल, कोरबा, मदुरै, महाड, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पुडुचेरी, पुडुकोट्टई, रायरंगपुर, रामनाथपुरम, रूपनगर, सागर, सांगली, सासाराम, सतना, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सूरत, ठाणे, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, उल्हासनगर, वापी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर आदि 73 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

प्रदूषण का आपातकाल: गाजियाबाद-नोएडा-दिल्ली में स्थिति गंभीर, शिलांग सबसे साफ