चित्रण: तारिक अजीज/सीएसई 
वायु

मंडीदीप में सांस लेना बना खतरा, ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंचा एक्यूआई

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 232 शहरों में महज छह फीसदी में साफ हवा, 56 फीसदी में हालात चिंताजनक

Lalit Maurya

  • 07 फरवरी 2026 को मंडीदीप देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 322 दर्ज किया गया और हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई।

  • 24 घंटे में एक्यूआई में 33 अंकों का उछाल आया, जबकि पीएम2.5 प्रदूषण पूरी तरह हावी रहा और यह स्तर सुरक्षित सीमा से 2000 फीसदी अधिक पाया गया।

  • दूसरी ओर शिलांग सबसे साफ शहर रहा (एक्यूआई 30)।

  • 232 शहरों के आंकड़ों के अनुसार केवल 6 फीसदी शहरों में हवा साफ है, जबकि 56 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं।

  • बल्लभगढ़ और मंडी गोबिंदगढ़ भी सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शीर्ष पर रहे, वहीं दिल्ली में भी प्रदूषण बढ़कर एक्यूआई 227 पहुंच गया।

  • फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 160 (+5) रिकॉर्ड किया गया है।  

विश्लेषण से पता चला है कि 07 फरवरी 2026 को देश में मंडीदीप की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 322 दर्ज किया गया। मतलब कि वायु गुणवत्ता बेहद खराब है। इससे पहले कल 06 फरवरी को मंडीदीप में वायु गुणवत्ता सूचकांक 289 दर्ज किया गया था। मतलब कि 24 घंटों में वहां सूचकांक में 33 अंकों का उछाल आया है।

रुझानों में सामने आया है कि मंडीदीप की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

मंडीदीप में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,000 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 30 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर मंडीदीप की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 10 गुणा खराब है।

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। हालांकि वहां वायु गुणवत्ता अभी भी खराब बनी हुई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 220 दर्ज किया गया था, जो 07 फरवरी को सात अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 227 पर पहुंच गया। इससे पहले 18 जनवरी को दिल्ली में 2026 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया।         

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 07 फरवरी 2026 को 232 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज छह फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 38.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 55.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 27.3 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 8.2 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरफ मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में करीब 5.3 फीसदी का इजाफा हुआ है।

खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 42.9 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है। इसके विपरीत बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 100 फीसदी का इजाफा हुआ है।

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 160 (+5) रिकॉर्ड किया गया है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बल्लभगढ़ (320) दूसरे जबकि मंडी गोबिंदगढ़ (300) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 266 अंकों के साथ चरखी दादरी चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम-गाजियाबाद में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 262 और 256 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

दिल्ली (227) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में श्री गंगानगर (221), नांदेड़ (214) और पीथमपुर (203) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में मध्य प्रदेश के दो (मंडीदीप और पीथमपुर) और हरियाणा के तीन शहर (बल्लभगढ़, चरखी दादरी, गुरुग्राम) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, चरखी दादरी, गुरुग्राम, गाजियाबाद, श्री गंगानगर, नांदेड़, पीथमपुर, हाजीपुर, नोएडा, बहादुरगढ़, धारूहेड़ा, झालावाड़, वातवा, वडोदरा, कोटा, नाहरलागुन, भिवाड़ी, यमुना नगर, मानेसर, पाली, बिलीपाड़ा, महाड, चित्तौड़गढ़, मंगुराहा, राजकोट, बागपत, बेलापुर, डूंगरपुर, हावड़ा, जालंधर, सिलीगुड़ी, बर्नीहाट, तुमकुरु, जींद, टोंक, कोलकाता, मुजफ्फरपुर, नागांव, भोपाल, मुजफ्फरनगर, भीलवाड़ा, गुम्मिडीपूंडी, नागपुर, कटनी, बेगूसराय, नारनौल, राउरकेला, मुंबई, गोरखपुर, बालासोर, बूंदी, रोहतक, हल्दिया, सांगली आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं बल्लभगढ़, सीकर, बीकानेर, ग्रेटर नोएडा, रूपनगर, तालचेर, हनुमानगढ़, सिंगरौली, सवाई माधोपुर, गांधीनगर, फरीदाबाद, पुणे, अहमदाबाद, सूरत, गुवाहाटी, नागौर, जयपुर, जैसलमेर, चंद्रपुर, अमरावती (आंधप्रदेश), जालोर, पिंपरी-चिंचवाड़, विशाखापत्तनम, बुलंदशहर, दौसा, झुंझुनू, भिवंडी, कुरुक्षेत्र, चुरू, अहमदनगर, मेरठ, उदयपुर, धनबाद, धुले, खुर्जा, बदलापुर, प्रतापगढ़, बद्दी, विरार, कोल्हापुर, पटना, रतलाम, अंगुल, अलवर, जलगांव, नवी मुंबई, भुवनेश्वर, उल्हासनगर, परभनी, सोलापुर, बारां, बोइसर, चेन्नई, सहरसा, इंदौर, लुधियाना, ग्वालियर, मीरा-भायंदर, राजमहेंद्रवरम, आसनसोल, कुंजेमुरा, दुर्गापुर, रामनगर, बारबिल, बठिंडा, नासिक, ब्रजराजनगर, गया, देवास, जोधपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 6 फीसदी यानी महज 14 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में फिरोजाबाद, किशनगंज, मदिकेरी, नागपट्टिनम, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, शिलांग, श्रीनगर, तंजावुर आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 89 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बेलगाम, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, चंडीगढ़, छाल, छपरा, चित्तूर, कोयंबटूर, दमोह, देहरादून, धौलपुर, फतेहाबाद, गंगटोक, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जलना, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, खन्ना, कोहिमा, कोल्लम, कोरबा, लातूर, लखनऊ, मंडीखेड़ा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मैसूर, पलवल, पटियाला, पेरुंदुरई, प्रयागराज, पुदुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, राजसमंद, ऋषिकेश, सागर, समस्तीपुर, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 119 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में अहमदाबाद, अहमदनगर, अलवर, अमरावती (आंधप्रदेश), अंगुल, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बदलापुर, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बारां, बारबिल, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तौड़गढ़, चुरू, कटक, दौसा, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कटनी, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लुधियाना, महाड, मानेसर, मंगुराहा, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नोएडा, पाली, परभनी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रामनगर, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, सहरसा, सांगली, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, सोलापुर, सूरत, तालचेर, टोंक, तुमकुरु, उदयपुर, उल्हासनगर, वडोदरा, वातवा, विरार, विशाखापत्तनम, यमुना नगर शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के आठ शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में चरखी दादरी, दिल्ली, गाजियाबाद, गुरुग्राम, मंडी गोबिंदगढ़, नांदेड़, पीथमपुर, श्री गंगानगर शामिल हैं।

वहीं बल्लभगढ़, मंडीदीप में वायु गुणवत्ता बेहद खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 232 में से महज 14 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 89 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 06 फरवरी 2026 को यह आंकड़ा 97 दर्ज किया गया था।

119 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज मंडीदीप में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 322 पर पहुंच गया। इससे पहले कल मंडीदीप में एक्यूआई 289 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 33 अंकों का उछाल आया है।

इससे पहले कल देवास में वायु गुणवत्ता सूचकांक 304 दर्ज किया गया था। जहां आज 203 अंकों के भारी सुधार के साथ सूचकांक घटकर 101 पर पहुंच गया। मतलब कि आज देवास में वायु गुणवत्ता बेहद खराब से सीधे मध्यम स्तर पर पहुंच गई है।

दिल्ली में 07 फरवरी को प्रदूषण में इजाफा दर्ज किया गया। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 220 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 227 पर पहुंच गया। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में सात अंकों का उछाल आया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 270 फीसदी अधिक खराब है।  

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है, जहां सूचकांक 160 (+5) रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 07 फरवरी को चरखी दादरी चौथे स्थान पर है, वहीं बल्लभगढ़ (320) दूसरे, जबकि मंडी गोबिंदगढ़ (300) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 110, गाजियाबाद में 256, गुवाहाटी में 154, गुरूग्राम में 262, नोएडा में 196, ग्रेटर नोएडा में 184 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 119 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 92, चेन्नई में 112, चंडीगढ़ में 78, हैदराबाद में 97, जयपुर में 150 और पटना में 118 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 14 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, बागलकोट, भिलाई, चामराजनगर, फिरोजाबाद, किशनगंज, मदिकेरी, नागपट्टिनम, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, शिलांग, श्रीनगर, तंजावुर शामिल हैं।

वहीं आगरा, अजमेर, अकोला, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बेलगाम, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, चंडीगढ़, छाल, छपरा, चित्तूर, कोयंबटूर, दमोह, देहरादून, धौलपुर, फतेहाबाद, गंगटोक, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जलना, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, खन्ना, कोहिमा, कोल्लम, कोरबा, लातूर, लखनऊ, मंडीखेड़ा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मैसूर, पलवल, पटियाला, पेरुंदुरई, प्रयागराज, पुदुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, राजसमंद, ऋषिकेश, सागर, समस्तीपुर, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, वृंदावन, यादगीर आदि 89 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

बड़े शहरों तक सीमित नहीं प्रदूषण, देवास में बढ़ते ओजोन से 300 के पार पहुंचा एक्यूआई