20 फरवरी 2026 को देश की हवा फिर बिगड़ी तस्वीर दिखाती है। ओडिशा का ब्यासनगर 295 एक्यूआई के साथ सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां महज 24 घंटों में 43 अंकों की छलांग दर्ज की गई और ओजोन प्रमुख प्रदूषक के रूप में हावी रहा। स्थिति इतनी गंभीर है कि यहां प्रदूषण स्तर डब्ल्यूएचओ की सुरक्षित सीमा से 390 फीसदी अधिक पहुंच गया।
टॉप-10 सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के छह शहर—चरखी दादरी, धारूहेड़ा, बल्लभगढ़, सिरसा, बहादुरगढ़ और गुरुग्राम—शामिल रहे, जो क्षेत्रीय प्रदूषण संकट की ओर इशारा करते हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 234 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला कि देश के केवल 4.3 फीसदी शहरों में हवा ‘बेहतर’ है, जबकि 56.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। साफ हवा वाले शहरों की संख्या में एक दिन में 16.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
जहां मदिकेरी में एक्यूआई महज 29 रहा, वहीं दिल्ली में भी प्रदूषण बढ़कर 210 पर पहुंच गया। कुल मिलाकर आंकड़े बताते हैं कि देशभर में प्रदूषण का उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन साफ हवा अपवाद बनती जा रही है।
विश्लेषण के मुताबिक 20 फरवरी 2026 को देश में ब्यासनगर सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 295 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले यानी 19 फरवरी को ब्यासनगर में एक्यूआई 252 था। यानी बीते 24 घंटों में प्रदूषण के स्तर में 43 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में सामने आया है कि ब्यासनगर की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
ब्यासनगर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 390 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 29 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर ब्यासनगर की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 10 गुणा खराब है।
गौरतलब है कि कल देश में कटक की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 303 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 84 अंकों के सुधार के साथ कटक में सूचकांक घटकर 219 पर पहुंच गया है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में इजाफा दर्ज किया गया है। इसके साथ ही आज भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।
कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 208 दर्ज किया गया था, जो 20 फरवरी को दो अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 210 पर पहुंच गया। इससे पहले 18 जनवरी को दिल्ली में 2026 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 20 फरवरी 2026 को 234 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 4.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 38.9 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 56.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 16.7 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 19.5 फीसदी की कमी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 9.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरफ खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 90.9 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 157 (-39) दर्ज किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में चरखी दादरी (290) दूसरे जबकि सिंगरौली (268) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 264 अंकों के साथ धारूहेड़ा चौथे स्थान पर है। बल्लभगढ़-सिरसा में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 260 और 254 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बिलाईपाड़ा (245) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद (245), बहादुरगढ़ (241) और गुरुग्राम (241) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के छह शहर (चरखी दादरी, धारूहेड़ा, बल्लभगढ़, सिरसा, बहादुरगढ़, गुरुग्राम) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि चरखी दादरी, सिंगरौली, धारूहेड़ा, सिरसा, बिलाईपाड़ा, गाजियाबाद, बहादुरगढ़, गुरुग्राम, नाहरलागुन, भिवाड़ी, बालासोर, नोएडा, सूरत, अंबाला, बागपत, गुम्मिडीपूंडी, हापुड़, मानेसर, कोलकाता, बर्नीहाट, एलूर, नागपुर, बारीपाड़ा, उल्हासनगर, फरीदाबाद, तुमडीह, वातवा, आसनसोल, मंडीदीप, यमुना नगर, पंचगांव, नलबाड़ी, चित्तौड़गढ़, मुजफ्फरनगर, ग्वालियर, नागांव, सोनीपत, करनाल, मुंबई, बेलापुर, नारनौल, आरा, सीकर, राजसमंद, जींद, कोटा, जालंधर, किशनगंज, मीरा-यंदर, भिवानी, बेगूसराय, विरार, नवी मुंबई, कटनी, हल्दिया आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बल्लभगढ़, ग्रेटर नोएडा, बारबिल, गया, तालचेर, गुवाहाटी, कुंजेमुरा, पुणे, पटना, कल्याण, भिवंडी, चंद्रपुर, सिलीगुड़ी, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, धनबाद, झुंझुनू, बीकानेर, ठाणे, अहमदाबाद, बुलंदशहर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), बदलापुर, ब्रजराजनगर, कुरुक्षेत्र, बद्दी, हनुमानगढ़, सहरसा, मंगुराहा, मालेगांव, राउरकेला, गोरखपुर, दुर्गापुर, रतलाम, राजकोट, गांधीनगर, सागर, रायरंगपुर, वडोदरा, बाड़मेर, महाड, राजमहेंद्रवरम, टोंक, नागौर, अहमदनगर, आगरा, रायपुर, विशाखापत्तनम, अमरावती (महाराष्ट्र), भोपाल, नासिक, भागलपुर, डूंगरपुर, पटियाला आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 4.3 फीसदी यानी महज 10 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बागलकोट, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, दमोह, फिरोजाबाद, गंगटोक, मदिकेरी, मुंगेर, शिलांग, श्रीनगर आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 91 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें दौसा, देहरादून, धारवाड़, धुले, फतेहाबाद, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जलगांव, जालोर, झांसी, जोधपुर, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, काशीपुर, कटिहार, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मैसूर, नांदेड़, पाली, पलवल, पंपोर, पंचकुला, परभनी, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुदुचेरी, पूर्णिया, रामनगर, ऋषिकेश, रोहतक, रूपनगर, समस्तीपुर, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 112 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अंकलेश्वर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बदलापुर, बारबिल, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बर्नीहाट, चंद्रपुर, छाल, चित्तौड़गढ़, चूरू, धनबाद, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हावड़ा, जयपुर, जालंधर, जलना, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, कल्याण, करनाल, कटनी, किशनगंज, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, महाड, मालेगांव, मंडीदीप, मानेसर, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पंचगांव, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, पुणे, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, सागर, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सोनीपत, श्री गंगानगर, तालचेर, ठाणे, टोंक, तुमडीह, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वातवा, विरार, विशाखापत्तनम, यमुना नगर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 21 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अंबाला, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, बिलाईपाड़ा, ब्यासनगर, चरखी दादरी, कटक, दिल्ली, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मिलुपारा, नाहरलागुन, नोएडा, सिंगरौली, सिरसा, सूरत शामिल हैं।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 234 में से महज 10 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 91 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 19 फरवरी 2026 को यह आंकड़ा 113 दर्ज किया गया था।
112 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज ब्यासनगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 295 पर पहुंच गया। इससे पहले कल ब्यासनगर में एक्यूआई 252 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 43 अंकों का इजाफा हुआ है।
कल कटक में वायु गुणवत्ता सूचकांक 303 दर्ज किया गया था। वहीं आज 84 अंकों के भारी सुधार के साथ एक्यूआई घटकर 219 पर पहुंच गया है। मतलब कि वायु गुणवत्ता बेहद खराब से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में 20 फरवरी को प्रदूषण में इजाफा दर्ज किया गया है। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 208 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 210 पर पहुंच गया। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में दो अंकों का इजाफा हुआ है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 250 फीसदी अधिक खराब है।
दूसरी तरफ फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में कल जहां एक्यूआई 196 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 157 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 20 फरवरी को धारूहेड़ा चौथे स्थान पर है, वहीं चरखी दादरी (290) दूसरे, जबकि सिंगरौली (268) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 142, गाजियाबाद में 245, गुवाहाटी में 170, गुरूग्राम में 241, नोएडा में 227, ग्रेटर नोएडा में 216 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 130 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 86, चेन्नई में 93, चंडीगढ़ में 88, हैदराबाद में 83, जयपुर में 112 और पटना में 153 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 10 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, दमोह, फिरोजाबाद, गंगटोक, मदिकेरी, मुंगेर, शिलांग, श्रीनगर शामिल हैं।
वहीं अजमेर, अकोला, अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बठिंडा, बेंगलुरु, बेतिया, भिलाई, भीलवाड़ा, बिलासपुर, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, चेन्नई, छपरा, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, दौसा, देहरादून, धारवाड़, धुले, फतेहाबाद, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जलगांव, जालोर, झांसी, जोधपुर, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, काशीपुर, कटिहार, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मैसूर, नांदेड़, पाली, पलवल, पंपोर, पंचकुला, परभनी, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुदुचेरी, पूर्णिया, रामनगर, ऋषिकेश, रोहतक, रूपनगर, समस्तीपुर, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, उदयपुर, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, वृंदावन, यादगीर आदि 91 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
कटक बना देश का सबसे प्रदूषित शहर, बढ़ते ओजोन से 300 के पार पहुंचा एक्यूआई