प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक 
वायु

धौलपुर में बढ़कर 217 पर पहुंचा एक्यूआई, बढ़ते पीएम2.5 से स्थिति हुई खराब

दिल्ली से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 88 पर पहुंच गया है

Lalit Maurya

देश के प्रदूषित शहरों में आज धौलपुर अव्वल है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 217 पर पहुंच गया है। मतलब की वहां की हवा लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खराब है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा 22 जुलाई 2025 को जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इस दौरान धौलपुर की हवा में प्रदूषण के महीन कण पीएम2.5 हावी थे।

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मानकों के लिहाज से देखें तो धौलपुर में प्रदूषण का स्तर 1,347 फीसदी अधिक है।

गौरतलब है कि कल देश में अमृतसर की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 234 दर्ज किया गया था। हालांकि कल से अमृतसर की हवा में 202 अंकों का भारी सुधार आया है, जिसके साथ ही अमृतसर में सूचकांक घटकर 32 पर पहुंच गया है।

वहीं दूसरी तरफ आज देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां एक्यूआई 15 रिकॉर्ड किया गया है। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर धौलपुर की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 13 गुणा अधिक खराब है।

विश्लेषण से पता चला है कि आज देश के जहां 44 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं छह फीसदी से अधिक शहरों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं, जबकि करीब आधे शहरों में स्थिति संतोषजनक है।

धौलपुर के बाद प्रदूषण के मामले में बारां (181) दूसरे जबकि नंदेसरी (176) तीसरे स्थान पर है। सूरत में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जहां एक्यूआई 142 दर्ज किया गया है। इसी तरह 130 अंकों के साथ कोटा पांचवे स्थान पर है। राजगीर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो आज छठे पायदान पर है। इनके साथ ही देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में अगरतला (123), भागलपुर (115), धनबाद (115) और ग्रेटर नोएडा (108) भी शामिल हैं।

आंकड़ों के मुताबिक आज देश में जहां बारां, सूरत, राजगीर, अगरतला, धनबाद, ग्रेटर नोएडा आदि शहरों में पीएम10 हावी है। वहीं धौलपुर, नंदेसरी, पाली, श्रीगंगानगर आदि में पीएम2.5 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इन शहरों के उलट देश में आइजोल सहित 97 शहरों में हवा साफ है। इन शहरों में हनुमानगढ़, हसन, हावेरी, हुबली, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, कलबुर्गी, कल्याण, करौली, क्योंझर, खन्ना, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, लातूर, मदिकेरी, मदुरै, मैहर, मंगलौर, मंगुराहा, मोतिहारी, मुंबई, मैसूर, नागपट्टिनम, नागपुर, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पालकालाइपेरुर, पंचगांव, पटियाला, पेरुंदुरई, प्रतापगढ़, प्रयागराज आदि शामिल हैं।

अच्छी खबर यह है कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में नौ फीसदी का इजाफा हुआ है।

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 88 पर पहुंच गया है। आंकड़ों के मुताबिक आज अहमदाबाद सहित देश के छोटे-बड़े 109 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक है।

इन शहरों में चुरू, दमोह, दौसा, दिल्ली, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, गाजियाबाद, गोरखपुर, गुम्मिडिपूंडी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड, होसुर, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनूं, जोधपुर, कडपा, कांचीपुरम, कन्नूर, कानपुर, काशीपुर, कटनी, खुर्जा, कोहिमा, कोरबा, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मेरठ, मुरादाबाद, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नगांव, नागौर, नलबाड़ी आदि शहर शामिल हैं।

राहत की खबर यह है कि कल से देश में संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी करीब दो फीसदी का इजाफा हुआ है।

इसी तरह आज देश के 13 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर मध्यम श्रेणी में है। इन शहरों में अगरतला, बारां, बेतिया, भागलपुर, धनबाद, गया, ग्रेटर नोएडा, कोटा, नंदेसरी, पाली, राजगीर, श्रीगंगानगर, सूरत शामिल हैं। चिंता की बात यह है कि कल से देश में मध्यम श्रेणी वाले शहरों की गिनती में 18 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 220 में से 97 शहरों में हवा 'बेहतर' (0-50 के बीच) है। 109 शहरों में वायु गुणवत्ता 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 21 जुलाई 2025 को यह आंकड़ा 107 दर्ज किया गया था।

13 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में धौलपुर (217) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां एक्यूआई 220 के करीब पहुंच गया। कल अमृतसर में वायु गुणवत्ता सबसे खराब थी, जब सूचकांक 234 रिकॉर्ड किया गया।

आंकड़ों पर गौर करें तो कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में पांच अंकों की गिरावट आई है। इसके साथ दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 88 पर पहुंच गया। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है। वहीं आज फिर सीपीसीबी ने फरीदाबाद के वायु गुणवत्ता से जुड़े आंकड़े साझा नहीं किए हैं।  

गौरतलब है कि पिछले चार महीनों जनवरी, फरवरी, मार्च और अप्रैल 2025 में एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब दिल्ली की हवा साफ कही जा सके। नवंबर में आठ दिन दिल्ली में वायु गुणवत्ता का स्तर 'गंभीर' दर्ज किया गया। इसी तरह दिसंबर 2024 में भी छह दिन वायु गुणवत्ता गंभीर दर्ज की गई थी। इस दौरान हवा में प्रदूषण का स्तर इतना ज्यादा था कि लोगों के लिए सांस लेना तक मुश्किल हो गया।

आंकड़ों के अनुसार प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में आज सूरत चौथे स्थान पर है, वहीं बारां (181) दूसरे, जबकि नंदेसरी (176) तीसरे स्थान पर है।

अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 66, गाजियाबाद में 100, गुवाहाटी में 38, हापुड में 67, नोएडा में 96, ग्रेटर नोएडा में 108 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 41 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 66, चेन्नई में 66, चंडीगढ़ में 53, हैदराबाद में 65, जयपुर में 88 और पटना में 88 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 97 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमृतसर, अरियालूर, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बांसवाड़ा, बारबिल, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बेलापुर, बेंगलुरु, भोपाल, भुवनेश्वर, चामराजनगर, छाल, चिकबलपुर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कुड्डालोर, कटक, दावनगेरे, देहरादून, देवास, डिंडीगुल, फिरोजाबाद, गडग, गांधीनगर, गुवाहाटी, हनुमानगढ़, हसन, हावेरी, हुबली, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, कलबुर्गी, कल्याण, करौली, क्योंझर, खन्ना, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, लातूर, मदिकेरी, मदुरै, मैहर, मंगलौर, मंगुराहा, मोतिहारी, मुंबई, मैसूर, नागपट्टिनम, नागपुर, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पालकालाइपेरुर, पंचगांव, पटियाला, पेरुंदुरई, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुदुचेरी, पुडुकोट्टई, पुणे, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रामनाथपुरम, राउरकेला, सलेम, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर, सुआकाती, टेन्सा, ठाणे, तंजावुर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुनेलवेली, तिरुपुर, तुमकुरु, वेल्लोर, विजयपुरा, विरार, विरुधुनगर, यादगीर शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आरा, आसनसोल, बद्दी, बदलापुर, बागपत, बालासोर, बरेली, बाड़मेर, भरतपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, बीकानेर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलन्दशहर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेंगलपट्टू, चेन्नई, चित्तूर, चुरू, दमोह, दौसा, दिल्ली, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, गाजियाबाद, गोरखपुर, गुम्मिडिपूंडी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड, होसुर, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनूं, जोधपुर, कडपा, कांचीपुरम, कन्नूर, कानपुर, काशीपुर, कटनी, खुर्जा, कोहिमा, कोरबा, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मेरठ, मुरादाबाद, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नगांव, नागौर, नलबाड़ी, नोएडा, पटना, पिंपरी-चिंचवाड, पीथमपुर, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजसमंद, रतलाम, रूपनगर, सागर, सासाराम, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, सिरोही, तालचेर, तिरुचिरापल्ली, टोंक, उदयपुर, वापी, वाराणसी, वातवा, विजयवाड़ा, वृंदावन आदि 109 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।