दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। गजरौला का एक्यूआई 399 तक बढ़ गया, जो बेहद खराब श्रेणी के करीब है।
दिल्ली का एक्यूआई 350 दर्ज किया गया, जबकि अन्य शहरों में भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब रही।
सीएक्यूएम ने ग्रैप के दूसरे चरण के उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं।
खराब श्रेणी (वायु गुणवत्ता सूचकांक 201–300) में शामिल 27 शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर हैं। इनमें बड़ौत में सबसे अधिक 297 वायु गुणवत्ता सूचकांक दर्ज किया गया।
इसके बाद नोएडा में 291, बुलंदशहर में 264, मुजफ्फरनगर में 241 और खुर्जा में 231 एक्यूआई रहा
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार बिगड़ रही हुआ है। 3 नवंबर को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बढ़कर 350 पहुंच गया, जबकि एक दिन पहले 2 नवंबर को यह 324 था। गजरौला आज भी पूरे देश में ऊपर बना हुआ है। यहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक 389 से बढ़कर 399 हो गया, जो बहुत खराब श्रेणी की ऊपरी सीमा (400 एक्यूआई) के करीब है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 3 नवंबर 2026 को शाम 4 बजे जारी वायु गुणवत्ता बुलेटिन के अनुसार बल्लभगढ़ में भी यह 278 से बढ़कर 319 और मोदीनगर में 287 से बढ़कर 305 दर्ज किया गया। वहीं गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता सूचकांक 246 से बढ़कर 305, मानेसर में 211 से बढ़कर 309 और पंचगांव में 214 से बढ़कर 320 पहुंच गया।
3 नवंबर को बागपत में वायु गुणवत्ता सूचकांक 360, बहादुरगढ़ में 324, खोड़ा में 318 दर्ज किया गया। हालांकि खोड़ा में एक अंक का मामूली सुधार हुआ, जहां सूचकांक 319 से घटकर 318 रहा।
इसके अलावा बड़ौत में वायु गुणवत्ता सूचकांक 341, हापुड़ में 339, नोएडा में 330, कैथल में 310 और फतेहपुर सीकरी में 306 दर्ज किया गया। इन सभी शहरों में हवा बहुत खराब श्रेणी में रही। वहीं गाजियाबाद में 289, ग्रेटर नोएडा में 289, बुलंदशहर में 289, खुर्जा में 290, मुजफ्फरनगर में 257, मेरठ में 234 और धारूहेड़ा में 298 वायु गुणवत्ता सूचकांक दर्ज किया गया। इन शहरों में हवा खराब श्रेणी में रही।
उधर, केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने 2 नवंबर 2026 को जारी आदेश में दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के दूसरे चरण यानी ‘खराब’ वायु गुणवत्ता (एक्यूआई 301–400) से संबंधित सभी उपाय तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया है।
आयोग के अनुसार, दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 31 अक्टूबर को 117 (मध्यम), 1 नवंबर को 261 (खराब) और 2 नवंबर को 324 (बहुत खराब) दर्ज किया गया। प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण आने वाले दिनों में भी वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बने रहने का अनुमान है। इसलिए पूरे एनसीआर में ग्रैप के दूसरे चरण के सभी उपाय लागू करने के साथ संबंधित एजेंसियों को इनका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
29 शहरों में साफ रही हवा
अच्छी श्रेणी में 29 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे कम दर्ज किया गया। इनमें कर्नाटक के मडिकेरी में सबसे कम 13 एक्यूआई रहा। इसके बाद गंगटोक में 23, अमरावती में 24, नयागढ़ में 25, राजमहेंद्रवरम में 28, बेतिया में 32, चिक्कबल्लापुर में 34, आइजोल में 35, कलबुर्गी और पुडुचेरी में 36 तथा श्रीनगर में 38 एक्यूआई दर्ज किया गया।
अन्य शहरों में विशाखापत्तनम में 39, काकीनाडा में 41, अनंतपुर और मिलुपारा में 42, चामराजनगर और विजयपुरा में 43, श्रीकाकुलम और बीड में 45, तेंसा में 46, राजगीर और राउरकेला में 47, कोल्हापुर में 48, ब्रजराजनगर और शिवमोगा में 49 तथा बारिपदा, चिक्कमगलुरु और लातूर में 50 वायु गुणवत्ता सूचकांक दर्ज किया गया।
27 शहरों में हवा खराब
खराब श्रेणी (वायु गुणवत्ता सूचकांक 201–300) में शामिल 27 शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर हैं। इनमें बड़ौत में सबसे अधिक 297 वायु गुणवत्ता सूचकांक दर्ज किया गया। इसके बाद नोएडा में 291, बुलंदशहर में 264, मुजफ्फरनगर में 241 और खुर्जा में 231 एक्यूआई रहा। इन शहरों में बड़ौत और नोएडा की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक रही। वहीं, अन्य राज्यों में करनाल में 277, सवाई माधोपुर में 274, श्रीगंगानगर में 273, भिवाड़ी में 262, हिसार में 259, बीकानेर में 252, रोहतक में 253 और अंबाला में 286 वायु गुणवत्ता सूचकांक दर्ज किया गया। इन सभी शहरों में हवा खराब श्रेणी में रही।
बुलेटिन के अनुसार, 78 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी (एक्यूआई 101–200) में दर्ज की गई। इनमें लेह में सबसे अधिक 199, दौसा में 197, गुम्मिडिपूंडी में 195, यमुनानगर में 194, गोपालगंज में 191, कुरुक्षेत्र में 190, ग्रेटर नोएडा में 189 और ग्वालियर में 188 एक्यूआई रहा।
इसके अलावा बार्निहाट (मेघालय) में 187, मुरादाबाद में 181, सीकर में 179, बद्दी में 174, कोटा में 171, नारनौल में 169, मंडीदीप में 163, सोनीपत और सिंगरौली में 160, झुंझुनू में 159 तथा आगरा में 159 दर्ज किया गया। जयपुर में 128, जोधपुर में 152, वाराणसी में 132, लखनऊ में 120 और प्रयागराज में 118 एक्यूआई रहा।
मध्यम श्रेणी में शामिल अन्य शहरों में अगरतला में 152, अहमदाबाद में 111, अमृतसर में 116, अंगुल में 104, अंकलेश्वर में 108, औरंगाबाद (बिहार) में 101, बारां में 116, बाड़मेर में 119, भागलपुर में 107, भरतपुर में 147, भीलवाड़ा में 116, भिवंडी में 125, भोपाल में 130, बूंदी में 123, चित्तौड़गढ़ में 150, चूरू में 127, धुले में 108, डोंबिवली में 120, फरीदाबाद में 106, फतेहाबाद में 111, फिरोजाबाद में 156 और गया में 129 वायु गुणवत्ता सूचकांक दर्ज किया गया।
इसके अलावा हाजीपुर में 122, हावड़ा में 132, जैसलमेर में 141, जालंधर में 147, जलगांव में 111, जालौर में 146, झालावाड़ में 125, खैरथल में 138, किऊल में 115, कोलकाता में 104, मालेगांव में 139, मंडी गोबिंदगढ़ में 151, मथुरा में 113, मेरठ में 156, मेहसाणा में 106, नागौर में 151, नांदेड़ में 110, नासिक में 116, नवी मुंबई में 105, पाली में 140, पटना में 109, पिंपरी-चिंचवड़ में 108, प्रतापगढ़ में 113, पुणे में 114, राजकोट में 122, सासाराम में 134, शामली में 138, सीवान में 104, उदयपुर में 118, उज्जैन में 134 और वृंदावन में 123 एक्यूआई दर्ज किया गया।
संतोषजनक श्रेणी में 127 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया। इनमें चंद्रपुर में सबसे अधिक 100, बिहारशरीफ में 99, देवास में 99, जोरापोखर में 98, रायचूर में 98, बैरकपुर में 97, महाड में 97 और मंडीखेड़ा में 97 एक्यूआई रहा। इसके अलावा कटक में 96, राजसमंद और सूरत में 95, मोतिहारी में 94, बक्सर, पूर्णिया, तलचर और तूतीकोरिन में 92 तथा बेलापुर और भावनगर में 91 दर्ज किया गया।
अन्य शहरों में अहमदनगर में 69, अजमेर में 75, अकोला में 62, अलवर में 87, अंबरनाथ में 55, अमरावती में 63, अररिया में 83, आसनसोल में 83, औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में 75, बदायूं नहीं बल्कि बदलापुर में 77, बागलकोट में 51, बालासोर में 67, बांसवाड़ा में 86, बारबिल में 55, बेगूसराय में 63, बेलगाम में 52, बेंगलुरु में 61, भिलाई में 71, भुवनेश्वर में 53, बीलेपाड़ा में 79, बोइसर में 60, व्यासनगर में 56, बर्निहाट (असम) में 88, चंडीगढ़ में 76, चेन्नई में 65, छल में 53, चित्तूर में 52, दमोह में 69, दरभंगा में 58, दावणगेरे में 64, डीग में 91, देहरादून में 51, धारवाड़ में 71, धौलपुर में 85, डूंगरपुर में 84, दुर्गापुर में 69, एलूर में 72, गांधीनगर में 82, गुवाहाटी में 61, हिंंगोली में 77, हुबली में 51, हैदराबाद में 57, इंदौर में 88 और जबलपुर में 90 एक्यूआई दर्ज किया गया।
इसके अलावा जालना में 75, जमुई में 77, झांसी में 90, कडप्पा में 67, कल्याण में 86, करौली में 77, कारवार में 65, कटिहार में 75, कटनी में 84, क्योंझर में 55, किशनगंज में 52, कोहिमा में 68, कोलार में 89, कोरबा में 70, कोटपुतली में 52, कुंजेमुरा में 55, कुरनूल में 61, मछलीपट्टनम में 56, मधुबनी में 67, मैहर में 61, मंगुराहा में 73, मीरा-भायंदर में 83, मुंबई में 85, मुंगेर में 86, मुजफ्फरपुर में 62, मैसूर में 74, नागांव में 64, नागपुर में 81, नाहरलगुन में 68, नेल्लोर में 63, ओंगोल में 55, पलवल में 61, पंचकूला में 78, पारादीप और परभणी में 57, रायबरेली में 66, रायपुर में 72, रायरंगपुर में 51, रामनगर में 57, रतलाम में 80, ऋषिकेश में 63, सागर में 81, सहरसा में 66, समस्तीपुर में 59, सतारा में 76, सतना में 70, शिलांग में 62, सिलचर में 53, सिलीगुड़ी में 52, सिरोही में 81, सीतामढ़ी में 64, शिवसागर में 69, सोलापुर में 67, सुकुआती में 62, ठाणे में 78, तिरुवनंतपुरम में 55, त्रिशूर में 51, तिरुमाला में 73, तुमिडीह में 53, उडुपी में 60, उल्हासनगर में 77, वडोदरा में 90, वापी में 87, विजयवाड़ा में 54 और विरार में 72 एक्यूआई दर्ज किया गया।