सभी शहरों से ज्यादा आज देश में आज अगरतला की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 331 तक पहुंच गया। इस दौरान अगरतला की हवा में ओजोन हावी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी मानकों के लिहाज से देखें तो वहां प्रदूषण का स्तर सुरक्षित सीमा से 452 फीसदी अधिक है।
मतलब की वहां की हवा में घुला जहर लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। गौरतलब है कि कल अगरतला में एक्यूआई महज 26 रिकॉर्ड किया गया था, मतलब की कल से वहां वायु गुणवत्ता में 305 अंकों की भारी गिरावट आई है।
दूसरी तरफ आज एक बार फिर देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 6 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर अगरतला की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 54 गुणा खराब है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 29 अगस्त 2025 को जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि देश के जहां 52 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 41 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा साफ है।
गौरतलब है कि कल ग्रेटर नोएडा में प्रदूषण से स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 154 तक पहुंच गया। हालांकि कल से ग्रेटर नोएडा की वायु गुणवत्ता में 40 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही वहां एक्यूआई घटकर 114 पर पहुंच गया।
प्रदूषण के मामले में आज टोंक (189) दूसरे जबकि जालौर (125) तीसरे स्थान पर है। वहीं 118 अंकों के साथ गुम्मिडिपूंडी चौथे पायदान पर है। कमोबेश ऐसी ही स्थिति जैसलमेर की भी है, जो 116 अंकों के साथ आज पांचवें स्थान पर है। बिहार के समस्तीपुर (115) और छपरा (114) में भी स्थिति कोई खास अच्छी नहीं है, जो आज प्रदूषित शहरों में छठे और सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में आज एलूर (114), ग्रेटर नोएडा (114) और मंडीदीप (109) भी शामिल हैं।
रुझानों से पता चला है कि जहां आज टोंक, समस्तीपुर, नोएडा, आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण यानी पीएम2.5 हावी हैं, वहीं जालौर, गुम्मिडिपूंडी, जैसलमेर, ग्रेटर नोएडा, मंडीदीप, पाली, बाड़मेर, दौसा, श्री गंगानगर आदि में पीएम10 हावी हैं। इसी तरह कई शहरों में ओजोन, कार्बन आदि प्रदूषकों से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
दूसरी तरफ आज देश में छोटे-बड़े 119 शहरों में हवा साफ है। इन शहरों में गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, होसुर, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जलगांव, झालावाड़, झुंझुनूं, कलबुर्गी, करौली, कारवार, काशीपुर, खुर्जा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मदिकेरी, मदुरै, महाड, मंगलौर, मंगुराहा, मिलुपारा, मोतिहारी, मैसूर, नागपट्टिनम, नागपुर, नाहरलगुन, नलबाड़ी आदि शामिल हैं।
चिंता की बात यह है कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब छह फीसदी की गिरावट आई है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, जहां 22 अंकों के सुधार के साथ वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है। इसी तरह देश में अजमेर सहित 95 शहरों में हवा संतोषजनक है।
इन शहरों में कोलकाता, कोटा, लखनऊ, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नगांव, नागौर, नमक्कल, पंचगांव, पटना, पिंपरी-चिंचवाड, पीथमपुर, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजसमंद, राउरकेला, सागर, सहरसा, सांगली शामिल हैं।
अच्छी खबर यह है कि कल से देश में संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में करीब छह फीसदी का इजाफा हुआ है।
इन शहरों के उलट आज देश के 14 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है। इन शहरों में बाड़मेर, छपरा, दौसा, एलूर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडिपूंडी, जैसलमेर, जालौर, मंडीदीप, नोएडा, पाली, समस्तीपुर, श्री गंगानगर, टोंक शामिल हैं। कल से तुलना करें तो देश में मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में करीब 17 फीसदी का इजाफा हुआ है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 229 में से 119 शहरों में हवा 'बेहतर' (0-50 के बीच) है। 95 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 28 अगस्त 2025 को यह आंकड़ा 90 दर्ज किया गया था।
14 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में अगरतला (331) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां एक्यूआई 350 के करीब पहुंच गया। कल ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक 154 रिकॉर्ड किया गया।
आंकड़ों पर गौर करें तो कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में गिरावट आई है। इसके साथ दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक सुधरकर 98 पर पहुंच गया। मलतब की दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है। वहीं आज फिर सीपीसीबी ने फरीदाबाद के वायु गुणवत्ता से जुड़े आंकड़े साझा नहीं किए हैं।
गौरतलब है कि पिछले दो-तीन महीनों में जून, जुलाई और अगस्त के दौरान दिल्ली की वायु गुणवत्ता ज्यादातर दिन संतोषजनक रही। वहीं जनवरी, फरवरी, मार्च और अप्रैल 2025 में एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब दिल्ली की हवा साफ कही जा सके। नवंबर में आठ दिन दिल्ली में वायु गुणवत्ता का स्तर 'गंभीर' दर्ज किया गया। इसी तरह दिसंबर 2024 में भी छह दिन वायु गुणवत्ता गंभीर दर्ज की गई थी। इस दौरान हवा में प्रदूषण का स्तर इतना ज्यादा था कि लोगों के लिए सांस लेना तक मुश्किल हो गया।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में आज गुम्मिडिपूंडी चौथे स्थान पर है, वहीं टोंक (189) दूसरे, जबकि जालौर (125) तीसरे स्थान पर है।
अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 71, गाजियाबाद में 95, गुवाहाटी में 42, हापुड में 57, नोएडा में 104, ग्रेटर नोएडा में 114 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 52 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 54, चेन्नई में 74, चंडीगढ़ में 44, हैदराबाद में 63, जयपुर में 59 और पटना में 62 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 119 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भरतपुर, भिलाई, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोईसर, बूंदी, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेंगलपट्टू, चिकबलपुर, चिक्कामगलुरु, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दावनगेरे, देहरादून, देवास, डिंडीगुल, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, होसुर, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जलगांव, झालावाड़, झुंझुनूं, कलबुर्गी, करौली, कारवार, काशीपुर, खुर्जा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मदिकेरी, मदुरै, महाड, मंगलौर, मंगुराहा, मिलुपारा, मोतिहारी, मैसूर, नागपट्टिनम, नागपुर, नाहरलगुन, नलबाड़ी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पालकालाइपेरुर, परभनी, पटियाला, पेरुंदुरई, प्रतापगढ़, पुदुचेरी, पुडुकोट्टई, रायपुर, रामनगर, रामनाथपुरम, रानीपेट, रतलाम, ऋषिकेश, शिलांग, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, टेन्सा, ठाणे, तंजावुर, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुनेलवेली, तिरुपुर, वाराणसी, वेल्लोर, विजयपुरा, विरार, विरुधुनगर, यादगीर शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमृतसर, अंगुल, अंकलेश्वर, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बदलापुर, बरेली, बेतिया, भागलपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, बिहार शरीफ, बीकानेर, ब्रजराजनगर, बुलन्दशहर, बक्सर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चुरू, दिल्ली, धनबाद, धारवाड़, दुर्गापुर, गांधीनगर, गाजियाबाद, गुरूग्राम, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हापुड, हैदराबाद, जयपुर, जालंधर, जलना, झांसी, जोधपुर, जोरापोखर, कांचीपुरम, कानपुर, करूर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, लखनऊ, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नगांव, नागौर, नमक्कल, पंचगांव, पटना, पिंपरी-चिंचवाड, पीथमपुर, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजसमंद, राउरकेला, सागर, सहरसा, सांगली, सासाराम, सवाई माधोपुर, सिंगरौली, सिरोही, तिरुवनंतपुरम, तिरुचिरापल्ली, तिरुपति, तुमिडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वापी, वातवा, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, वृंदावन आदि 95 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।