सुधार के बावजूद केवल 14 एनसीएपी शहर 2025-26 में सालाना पीएम10 के राष्ट्रीय मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पर खरे उतरे। फोटो साभार: आईस्टॉक
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स्वच्छ वायु दिवस पर राहत की तस्वीर, 108 शहरों में प्रदूषण घटने का दावा, कई शहरों में हवा अब भी जहरीली

सरकार के आंकड़ों के अनुसार, भारत के 108 शहरों में हवा हुई बेहतर, लेकिन कई शहर अब भी मानकों से बाहर; स्वच्छ वायु दिवस पर प्रदूषण घटाने की चुनौती और तेज कार्रवाई की जरूरत सामने आई

Dayanidhi

  • एनसीएपी के 130 शहरों में 108 शहरों ने 2025-26 में 2017-18 के मुकाबले पीएम10 प्रदूषण में कमी दर्ज की।

  • 72 शहरों में पीएम10 प्रदूषण 20 प्रतिशत से अधिक घटा, जबकि 26 शहरों में कमी 40 प्रतिशत से ज्यादा रही।

  • सुधार के बावजूद केवल 14 एनसीएपी शहर 2025-26 में सालाना पीएम10 के राष्ट्रीय मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पर खरे उतरे।

  • विशाखापत्तनम में पीएम10 स्तर 76 से बढ़कर 119 माइक्रोग्राम हुआ, जिससे शहरों के बीच प्रदूषण की असमान स्थिति सामने आई।

  • दिल्ली में पीएम10 200 और पीएम2.5 102 माइक्रोग्राम रहा, जो बताता है कि सुधार के बावजूद प्रदूषण गंभीर चुनौती बना हुआ।

हर साल सात सितंबर को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस या नीले आसमान के लिए स्वच्छ हवा का अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता रहा है। भारत में इसे स्वच्छ वायु दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को वायु प्रदूषण के खतरों के बारे में जागरूक करना और साफ हवा के लिए जरूरी कदमों पर ध्यान दिलाना है।

भारत के लिए यह दिन खास महत्व रखता है। देश के कई बड़े शहर आज भी प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं। वाहनों का धुआं, उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषण, निर्माण कार्यों की धूल, कचरा जलाना और पराली जैसे कारण हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। इसका असर केवल पर्यावरण पर नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।

108 शहरों में प्रदूषण घटा

सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम यानी एनसीएपी के तहत शामिल 130 शहरों में से 108 शहरों में वर्ष 2025-26 के दौरान पीएम10 का सालाना स्तर 2017-18 की तुलना में कम हुआ है।

इनमें 72 शहर ऐसे हैं जहां पीएम10 में 20 प्रतिशत से अधिक कमी दर्ज की गई। वहीं 26 शहरों में कमी 40 प्रतिशत से अधिक रही। यह आंकड़ा बताता है कि देश के कई शहरों में वायु प्रदूषण कम करने के प्रयासों का असर दिखाई दे रहा है। लेकिन तस्वीर पूरी तरह अच्छी नहीं है। 130 में से 22 शहरों में पीएम10 का स्तर 2017-18 की तुलना में बढ़ गया। इसका मतलब है कि देश के सभी शहरों में प्रदूषण कम होने की एक जैसी स्थिति नहीं है।

प्रदूषण कम होना और साफ हवा मिलना अलग बात

सरकारी आंकड़ों को समझते समय एक महत्वपूर्ण बात ध्यान रखना जरूरी है। किसी शहर में प्रदूषण पहले के मुकाबले कम होना यह साबित नहीं करता कि वहां की हवा अब साफ है।

भारत में सालाना पीएम10 के लिए राष्ट्रीय मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। वर्ष 2025-26 में एनसीएपी के 130 शहरों में से केवल 14 शहर इस मानक को पूरा कर पाए। वर्ष 2017-18 में ऐसे शहरों की संख्या केवल छह थी। इसलिए किसी शहर की स्थिति समझने के लिए दो बातें देखनी चाहिए। पहली, क्या प्रदूषण पहले के मुकाबले कम हुआ है? दूसरी, क्या वर्तमान प्रदूषण राष्ट्रीय मानक के भीतर है?

उदाहरण के लिए, कोहिमा में 2025-26 में पीएम10 का स्तर 47 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जो राष्ट्रीय मानक से कम है। दूसरी ओर, दिल्ली में यह स्तर 200 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। दिल्ली में पहले की तुलना में सुधार हुआ है, लेकिन प्रदूषण अभी भी राष्ट्रीय सीमा से काफी ऊपर है।

कुछ शहरों में स्थिति उलटी हुई

जहां ज्यादातर शहरों में पीएम10 का स्तर घटा, वहीं कुछ शहरों में प्रदूषण बढ़ा भी है। इनमें विशाखापत्तनम का आंकड़ा खास चिंता पैदा करता है। विशाखापत्तनम में 2017-18 में पीएम10 का सालाना स्तर 76 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था। वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 119 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गया। यानी इसमें 56 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई।

यह दिखाता है कि स्वच्छ हवा की लड़ाई में हर शहर की अपनी चुनौतियां हैं। केवल योजनाएं बनाने या धन खर्च करने से समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी। स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के कारणों को पहचानना और उन पर लगातार कार्रवाई करना जरूरी है।

दिल्ली, मुंबई और दूसरे बड़े शहर

पीएम2.5 के आंकड़े भी देश के प्रमुख शहरों की अलग तस्वीर दिखाते हैं। साल 2025-26 में हैदराबाद में पीएम2.5 का सालाना स्तर 34 माइक्रोग्राम, सूरत में 32 माइक्रोग्राम और मुंबई में 33 माइक्रोग्राम रहा। भारत में पीएम2.5 का सालाना राष्ट्रीय मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। इस लिहाज से इन तीनों शहरों का स्तर मानक के भीतर रहा। पुणे में यह 41 माइक्रोग्राम रहा, जो मानक से थोड़ा अधिक है। दिल्ली में पीएम2.5 का स्तर 102 माइक्रोग्राम रहा, जो काफी अधिक है।

एक्यूआई और पीएम10 एक नहीं

वायु प्रदूषण की चर्चा में पीएम10, पीएम2.5 और एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई को अलग-अलग समझना जरूरी है।

एक्यूआई किसी समय हवा की स्थिति बताने में मदद करता है। इसमें शून्य से 50 तक की हवा को अच्छी, 51 से 100 तक संतोषजनक और 101 से 200 तक मध्यम माना जाता है। 201 से 300 तक हवा खराब, 301 से 400 तक बहुत खराब और 401 से 500 तक गंभीर मानी जाती है। वहीं, पीएम10 और पीएम2.5 के सालाना आंकड़े लंबे समय की स्थिति को समझने में मदद करते हैं। इसलिए किसी शहर का एक दिन का एक्यूआई और उसका सालाना पीएम10 स्तर एक ही चीज नहीं है।

साफ हवा के लिए लगातार प्रयास जरूरी

स्वच्छ वायु दिवस 2026 भारत के लिए यह याद दिलाने का अवसर है कि कुछ शहरों में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन चुनौती अभी बड़ी है। साफ हवा के लिए सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाना, कचरा जलाने पर रोक लगाना, निर्माण स्थलों की धूल कम करना, उद्योगों के प्रदूषण पर निगरानी बढ़ाना और हरित क्षेत्र बढ़ाना जरूरी है।

सरकार के साथ आम लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। निजी वाहनों का कम इस्तेमाल, कचरा न जलाना और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की जानकारी देना छोटे लेकिन जरूरी कदम हैं। भारत की स्वच्छ हवा की कहानी में प्रगति दिखाई दे रही है, लेकिन मंजिल अभी दूर है। असली सफलता तब मानी जाएगी जब प्रदूषण में कमी के साथ-साथ ज्यादा से ज्यादा शहर राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों को भी पूरा करेंगे।