दुनिया के 75 से अधिक देशों में कपास की खेती होती है, जो लाखों किसानों और श्रमिकों की आजीविका का प्रमुख आधार है।
भारत में करीब 115 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती होती है, जिसमें लगभग 60 लाख किसान जुड़े हैं।
भारत कपास की खेती के क्षेत्रफल में दुनिया में पहले और उत्पादन में दूसरे प्रमुख स्थान पर है।
चीन, भारत, ब्राजील, अमेरिका और पाकिस्तान दुनिया के प्रमुख कपास उत्पादक देशों में शामिल हैं और वैश्विक व्यापार में योगदान देते हैं।
2026 की थीम व्यापार, मूल्यवर्धन, साझेदारी और टिकाऊ उत्पादन के जरिए कपास क्षेत्र में आर्थिक समृद्धि बढ़ाने पर जोर देती है।
हर साल सात अक्टूबर को विश्व कपास दिवस मनाया जाता है। यह दिन कपास के महत्व, इससे जुड़े किसानों, श्रमिकों और उद्योगों के योगदान को पहचानने का अवसर देता है। कपास दुनिया की प्रमुख प्राकृतिक रेशेदार फसलों में से एक है। यह खेती से लेकर कपड़ा निर्माण और अंतरराष्ट्रीय व्यापार तक लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ी हुई है। वर्ष 2026 में विश्व कपास दिवस की थीम 'व्यापार, बदलाव और साझेदारी के जरिए समृद्धि का निर्माण करना' है।
कपास का व्यापक महत्व
कपास मुख्य रूप से कपास के पौधे के बीजों से मिलने वाला प्राकृतिक और पौधों पर आधारित रेशा है। इसका उपयोग सबसे अधिक कपड़े और वस्त्र बनाने में किया जाता है। वहीं, कपास के बीजों से तेल निकाला जाता है और बची हुई खली का उपयोग पशु आहार के रूप में भी किया जाता है।
कपास केवल एक कृषि फसल नहीं है, बल्कि यह एक बड़े आर्थिक चक्र का हिस्सा है। किसान कपास की खेती करते हैं, जिसके बाद इसकी जिनिंग, कताई, बुनाई, रंगाई, प्रसंस्करण और कपड़ा तथा परिधान निर्माण का काम होता है। इस पूरी प्रक्रिया में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है।
भारत में कपास की बड़ी भूमिका
भारत कपास के क्षेत्रफल के मामले में दुनिया में पहले स्थान पर है और उत्पादन के मामले में दूसरे प्रमुख देशों में शामिल है। देश में लगभग 60 लाख किसान कपास की खेती से जुड़े हैं। इसके अलावा कपड़ा उद्योग और पूरी वैल्यू चेन में लाखों लोगों को रोजगार मिलता है।
केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के अनुसार, भारत में लगभग 115 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती होती है। देश के कपास उत्पादक क्षेत्रों को मुख्य रूप से उत्तरी, मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में बांटा जाता है। उत्तरी क्षेत्र में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान, मध्य क्षेत्र में गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश तथा दक्षिणी क्षेत्र में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक प्रमुख कपास उत्पादक राज्य हैं।
खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियां
कपास की फसल के लिए गर्म जलवायु उपयुक्त मानी जाती है। पौधे की वृद्धि के दौरान पर्याप्त नमी की जरूरत होती है, जबकि कपास के फल यानी बॉल खुलने और कटाई के समय अपेक्षाकृत सूखा मौसम बेहतर रहता है।
कपास गहरी, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में अच्छी तरह उगता है। भारत के दक्कन क्षेत्र की काली मिट्टी, जिसे रेगुर मिट्टी भी कहा जाता है, कपास की खेती के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है। कपास कुछ हद तक सूखे को सहन कर सकती है, लेकिन जहां वर्षा कम या अनियमित होती है, वहां सिंचाई से उत्पादन में काफी सुधार हो सकता है।
दुनिया में कपास का कारोबार
कपास का उत्पादन दुनिया के 75 से अधिक देशों में होता है। चीन, भारत, ब्राजील, अमेरिका और पाकिस्तान प्रमुख कपास उत्पादक देशों में शामिल हैं। कपास का अंतरराष्ट्रीय व्यापार अनेक देशों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कपास की खेती से लेकर तैयार कपड़े तक की प्रक्रिया कई देशों और उद्योगों को जोड़ती है। इसलिए कपास का व्यापार केवल किसानों की आय से नहीं, बल्कि वैश्विक कपड़ा उद्योग, रोजगार और निर्यात से भी जुड़ा हुआ है।
2026 की थीम में बदलाव पर जोर
विश्व कपास दिवस 2026 की थीम कपास क्षेत्र में व्यापार, मूल्यवर्धन और साझेदारी को मजबूत करने पर जोर देती है। केवल कच्ची कपास का उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि कच्ची कपास से अधिक मूल्य वाले धागे, कपड़े और तैयार उत्पाद बनाए जाएं। इससे किसानों और कपास उत्पादक समुदायों की आय बढ़ाने के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
थीम टिकाऊ और मजबूत कपास उत्पादन की जरूरत को भी सामने रखती है। बदलते मौसम और बाजार की चुनौतियों के बीच किसानों, उद्योगों, सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच बेहतर सहयोग जरूरी है।
विश्व कपास दिवस की शुरुआत
विश्व कपास दिवस पहली बार सात अक्टूबर 2019 को जिनेवा स्थित विश्व व्यापार संगठन के मुख्यालय में मनाया गया था। इसकी पहल अफ्रीका के चार कपास उत्पादक देशों बेनिन, बुर्किना फासो, चाड और माली ने की थी। इन देशों को सामूहिक रूप से “कॉटन-4” कहा जाता है।
इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2021 में प्रस्ताव ए/आरईएस /75/318 के माध्यम से सात अक्टूबर को आधिकारिक रूप से विश्व कपास दिवस के रूप में मान्यता दी। तब से यह दिन कपास से जुड़े रोजगार, आजीविका, व्यापार और आर्थिक विकास पर चर्चा का महत्वपूर्ण अवसर बन गया है।
विश्व कपास दिवस इस बात की याद दिलाता है कि खेतों में उगने वाली कपास केवल एक फसल नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की आय और करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़ी आर्थिक कड़ी है। टिकाऊ खेती, बेहतर व्यापार, तकनीकी बदलाव और मजबूत साझेदारी के जरिए कपास क्षेत्र किसानों और उद्योगों के लिए समृद्धि के नए रास्ते खोल सकता है।