फाइल: सीएसई 
कृषि

गेहूं के एमएसपी में 1 फीसदी से भी कम की बढ़ोतरी, लागत पर 50 से 106 फीसदी तक मार्जिन सुनिश्चित का दावा

एमएसपी में सबसे अधिक वृद्धि कुसुम के लिए घोषित की गई है, जो 675 रुपये प्रति क्विंटल है

DTE Staff

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने विपणन सीजन 2027-28 के लिए छह प्रमुख रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। गेहूं का एमएसपी 2,585 से बढ़ाकर 2,610 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है।

गेहूं के एमएसपी में इस बार महज 25 रुपए प्रति क्विंटल, यानी करीब 0.97 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। 2026-27 में 2,585 रुपए से बढ़ाकर 2027-28 के लिए 2,610 रुपए प्रति क्विंटल किया गया है।

एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि 2027-28 के लिए जौ का 2,150 से 2,286 रुपए, चना का 5,875 से 5,958 रुपए, मसूर का 7,000 से 7,390 रुपए, रेपसीड और सरसों का 6,200 से 6,613 रुपए तथा कुसुम का 6,540 से 7,215 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है।

सबसे अधिक 675 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कुसुम के एमएसपी में की है। इसके बाद रेपसीड और सरसों में 413 रुपए, मसूर में 390 रुपए, जौ में 136 रुपए, चना में 83 रुपए और गेहूं में 25 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है।

सरकार के अनुसार, इन फसलों के उत्पादन की अखिल भारतीय भारित औसत लागत पर एमएसपी में मार्जिन गेहूं के लिए 106 प्रतिशत, रेपसीड और सरसों के लिए 96 प्रतिशत, मसूर के लिए 92 प्रतिशत, चना के लिए 59 प्रतिशत, जौ के लिए 58 प्रतिशत और कुसुम के लिए 50 प्रतिशत है।

सरकार ने कहा है कि यह वृद्धि 2018-19 के केंद्रीय बजट में की गई उस घोषणा के अनुरूप है, जिसके तहत एमएसपी को उत्पादन की अखिल भारतीय भारित औसत लागत से कम से कम 1.5 गुना रखने का लक्ष्य तय किया गया था। सरकार के मुताबिक, बढ़ा हुआ एमएसपी किसानों को लाभकारी मूल्य देने के साथ दलहन और तिलहन जैसी फसलों के उत्पादन तथा फसल विविधीकरण को बढ़ावा देगा।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 से 2025-26 के दौरान गेहूं की खरीद 3,715 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह 2,254 लाख मीट्रिक टन थी। इसी अवधि में छह रबी फसलों की खरीद 3,921 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि पिछली अवधि में यह 2,302 लाख मीट्रिक टन थी।

गेहूं उत्पादक किसानों को 2014-15 से 2025-26 के दौरान एमएसपी के रूप में 7.31 लाख करोड़ रुपए का भुगतान किया गया, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह राशि 2.56 लाख करोड़ रुपए थी। छह रबी फसलों के लिए यह राशि क्रमशः 8.36 लाख करोड़ और 2.65 लाख करोड़ रुपए रही।

महंगाई के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने रबी सीजन 2027-28 के लिए घोषित एमएसपी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार को समर्थन मूल्य घोषित करने के साथ फसलों की उत्पादन लागत और महंगाई से जुड़े आंकड़े भी सार्वजनिक करने चाहिए।

उन्होंने कहा कि गेहूं के एमएसपी में महज 25 रुपए यानी करीब 0.96 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है, जबकि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण खरपतवारनाशक और कीटनाशकों की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ डीजल, सल्फर और अन्य पोषक तत्वों की लागत भी बढ़ी है।

मलिक ने कहा कि ऐसे में गेहूं के एमएसपी में मामूली बढ़ोतरी किसानों की बढ़ती लागत के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सरकार से गेहूं की उत्पादन लागत का आधार भी सार्वजनिक करने की मांग की और पूछा कि कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना और पंतनगर ने गेहूं उत्पादन की कितनी लागत आंकी है। उन्होंने कहा कि सरकार को एमएसपी की घोषणा के साथ लागत के आंकड़ों की प्रमाणिक जानकारी भी जारी करनी चाहिए।