एफएओ ने कहा कि दुनिया “इनपुट संकट” की ओर बढ़ रही है
उर्वरक, ऊर्जा और शिपिंग में थोड़ी रुकावट भी खाद्य कीमतों में तेज उछाल ला सकती है।
होर्मुज गतिरोध, बायोफ्यूल की ओर झुकाव और अल नीनो मिलकर “परफेक्ट स्टॉर्म” बना सकते हैं ।
वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर कोविड-19 के बाद से भी बड़ा संकट खड़ा कर सकते हैं।
पहले से कम कीमत पा रहे किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं।
दुनिया कोविड-19 महामारी से भी अधिक गंभीर खाद्य संकट की ओर बढ़ रही है। इसे "परफेक्ट स्टॉर्म" कहा जा रहा है, जिसका आशय है कि कई गंभीर समस्याएं एक साथ मिलकर बड़ा संकट बन सकता है।
यह आशंका संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने जताई है। एफएओ के रोम मुख्यालय से 13 अप्रैल 2026 को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में चेताया गया है, "यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज गतिरोध पर समय रहते काबू नहीं पाया गया और इसके साथ अल नीनो जैसे जलवायु प्रभाव भी जुड़ गए, तो “परफेक्ट स्टॉर्म” जैसी स्थिति बन सकती है, जो महामारी के बाद के संकट से भी अधिक गंभीर होगी।"
एफएओ के अनुसार, दुनिया के 20 से 45 प्रतिशत तक महत्वपूर्ण कृषि इनपुट जैसे उर्वरक और ऊर्जा इसी समुद्री मार्ग (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से होकर गुजरते हैं और अगर वर्तमान में जारी गतिरोध यदि जल्द खत्म नहीं हुआ, तो यह वैश्विक खाद्य आपूर्ति और कीमतों पर गंभीर असर डाल सकता है।
एफएओ ने आगाह किया कि दुनिया भर के किसान पहले से ही बहुत कम मुनाफे पर खेती कर रहे हैं। यदि वे घाटे में जाकर खेती छोड़ने या दिवालिया होने को मजबूर होते हैं, तो वैश्विक खाद्य आपूर्ति की स्थिति लंबे समय तक खराब रह सकती है।
एफएओ के मुताबिक मार्च में खाद्य मूल्य सूचकांक अपेक्षाकृत स्थिर रहा, क्योंकि अनाज सहित अधिकांश खाद्य वस्तुओं की पर्याप्त आपूर्ति थी। अब अप्रैल में समस्या बढ़ रही है और मई में और बढ़ेगी, क्योंकि किसान यह तय करेंगे कि उन्हें कितनी और कौन-सी फसल बोनी है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्हें खाद (उर्वरक) मिल पा रही है या नहीं।
इतना ही नहीं, तेल की कीमतें बढ़ने पर कुछ किसान खाने वाली फसलों की बजाय बायोफ्यूल (ईंधन बनाने वाली फसल) उगाने लग सकते हैं, जिससे खाने की चीजों की कमी हो सकती है।
प्रेस विज्ञप्ति में एफएओ के अधिकारी लैबोर्डे के हवाले से कहा गया है कि दुनिया इस समय “इनपुट संकट” का सामना कर रही है और यदि समय पर कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्थिति गंभीर आपदा में बदल सकती है।
एफएओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि किसानों को पर्याप्त उर्वरक और अन्य संसाधन नहीं मिले तो इस वर्ष और 2027 में फसल उत्पादन घटेगा। इसके चलते खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि और खुदरा महंगाई बढ़ने की आशंका है, जो आने वाले वर्षों तक बनी रह सकती है।
खाद्य एवं कृषि संगठन ने देशों से अपील की है कि वे बायोफ्यूल से जुड़े अनिवार्य प्रावधानों पर पुनर्विचार करें और ऊर्जा व उर्वरकों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से बचें, क्योंकि इससे वैश्विक बाजार में असंतुलन और बढ़ सकता है।
एफएओ ने यह भी सुझाव दिया है कि यदि होर्मुज में गतिरोध जारी रहता है, तो जोखिम झेल रहे देशों को तत्काल वित्तीय सहायता दी जानी चाहिए। इसके लिए इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड की बैलेंस ऑफ पेमेंट सुविधाओं और “फूड शॉक विंडो” का उपयोग किया जा सकता है। यह व्यवस्था 2022 में सुझाई गई फूड इम्पोर्ट फाइनेंसिंग पहल के आधार पर विकसित की गई है।
इस तंत्र के जरिए जरूरतमंद देशों को तुरंत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है, ताकि वे समय पर उर्वरक खरीद सकें और खेती प्रभावित न हो। साथ ही, इससे देशों के बीच सब्सिडी की होड़ से बाजार के बिगड़ने का खतरा भी कम होगा।
एफएओ के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने कहा कि उर्वरक और ऊर्जा बाजार बहुत कम लचीले होते हैं, इसलिए आपूर्ति में थोड़ी कमी भी कीमतों में तेज उछाल ला सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जहाजों की आवाजाही जल्द बहाल नहीं हुई, तो बाजार बहुत तेजी से प्रतिक्रिया करेगा।
टोरेरो ने कहा कि यह संकट प्राकृतिक आपदा नहीं है और सरकारें मिलकर इसे हल कर सकती हैं। हालांकि, यदि मौजूदा स्थिति पर समय रहते काबू नहीं पाया गया और इसके साथ El Niño जैसे जलवायु प्रभाव भी जुड़ गए, तो “परफेक्ट स्टॉर्म” जैसी स्थिति बन सकती है, जो महामारी के बाद के संकट से भी अधिक गंभीर होगी।
एफएओ ने स्पष्ट किया है कि जोखिम पहले से कहीं अधिक हैं और त्वरित, समन्वित वैश्विक कार्रवाई ही संभावित खाद्य संकट को टाल सकती है।