इलेस्ट्रेशन: योगेंद्र आनंद 
कृषि

भारत में हर घंटे एक किसान की आत्महत्या: 2024 में मामूली कमी के बावजूद 10,546 किसान व खेतिहर मजदूर ने दी जान

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने आज भारत में आकस्मिक मौतें और आत्महत्याएं 2024 रिपोर्ट जारी की

Kiran Pandey

  • एनसीआरबी की ‘भारत में आकस्मिक मौतें और आत्महत्याएं 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में कृषि क्षेत्र से जुड़े 10,546 लोगों ने आत्महत्या की, जो कुल आत्महत्याओं का 6.2% है।

  • इनमें 5,913 कृषि मजदूर (56%) हैं, जो पांच साल में सबसे अधिक है।

  • हर दिन औसतन 28 किसान व मजदूर जान दे रहे हैं और हर घंटे लगभग एक किसान आत्महत्या कर रहा है।

  • 2022 के बाद से कुल संख्या में मामूली कमी के बावजूद किसानों और कृषि मजदूरों की आत्महत्याएं चिंताजनक स्तर पर बनी हुई हैं।

  • महाराष्ट्र में 3,824 मामलों के साथ सबसे आगे है, जहां चरम मौसम से 20 लाख हेक्टेयर से अधिक फसल प्रभावित हुई।

  • कर्नाटक, मध्य प्रदेश और पुडुचेरी में भी तेज वृद्धि दर्ज हुई।

खेती से जुड़े 10,546 लोगों में आत्महत्या करने वालों में 5,913 कृषि मजदूर थे। यानी कुल मामलों में उनकी हिस्सेदारी 56 प्रतिशत रही, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे ज्यादा है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा आज जारी भारत में आकस्मिक मौतें और आत्महत्याएं 2024 रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में कृषि क्षेत्र से जुड़े 10,546 लोगों ने आत्महत्या की। यह देश में कुल 1,70,746 आत्महत्याओं का 6.2 प्रतिशत है।

यह संख्या 2023 की तुलना में थोड़ी कम है, जब 10,786 किसानों और कृषि मजदूरों ने आत्महत्या की थी। फिर भी देश में प्रतिदिन लगभग 28 किसान और कृषि मजदूर आत्महत्या कर रहे हैं। वर्ष 2022 में कृषि क्षेत्र में आत्महत्याओं की संख्या सबसे अधिक 11,290 दर्ज की गई थी और उसके बाद से इसमें लगातार कमी आई है। लेकिन पिछले पांच वर्षों के रुझान बताते हैं कि जमीनी हालात में बहुत अधिक बदलाव नहीं हुआ है। भारत में अब भी लगभग हर घंटे एक किसान आत्महत्या कर रहा है।

हालिया एनसीआरबी आंकड़ों में एक और चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आई है। खेती में लगे जिन 10,546 लोगों ने आत्महत्या की, उनमें 56 प्रतिशत यानी 5,913 कृषि मजदूर थे। यह पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है। वर्ष 2020 में कृषि क्षेत्र की कुल आत्महत्याओं में इनकी हिस्सेदारी 47.75 प्रतिशत थी।

कृषि मजदूरों में आत्महत्या की हिस्सेदारी पहली बार 2021 में बढ़ी थी और उसके बाद से इसमें लगातार वृद्धि हो रही है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्षों से औसत कृषि परिवार की आय में खेती से होने वाली मजदूरी पर निर्भरता बढ़ती जा रही है, जबकि फसल उत्पादन से आय अपेक्षाकृत कम हो रही है।

किसान भी संकट में

हालांकि किसानों/कृषकों के बीच आत्महत्याओं में पिछले वर्षों में गिरावट देखी गई थी, लेकिन 2024 में इसमें मामूली वृद्धि दर्ज की गई। 2023 में कुल कृषि आत्महत्याओं में किसानों की हिस्सेदारी 43.48 प्रतिशत थी, जो 2024 में बढ़कर 43.93 प्रतिशत हो गई। यह वृद्धि 2021 के बाद लगातार हो रही गिरावट के बाद दर्ज की गई है।

महाराष्ट्र में सबसे अधिक आत्महत्याएं

कृषि क्षेत्र में आत्महत्या के सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र में दर्ज किए गए, जहां किसानों और कृषि मजदूरों की कुल 3,824 आत्महत्याएं हुईं। यह न केवल सबसे अधिक संख्या थी, बल्कि देश में कृषि क्षेत्र की कुल आत्महत्याओं का 36.26 प्रतिशत हिस्सा भी महाराष्ट्र से आया।

हालांकि एनसीआरबी रिपोर्ट इन आत्महत्याओं के कारणों का उल्लेख नहीं करती, लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि वर्ष 2024 में महाराष्ट्र में बाढ़ सहित चरम मौसमीय घटनाओं के कारण कम-से-कम 20,37,651 हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ था। यह देशभर में चरम मौसमीय घटनाओं से प्रभावित कुल 40,72,523 हेक्टेयर फसल क्षेत्र का लगभग 50 प्रतिशत था।

महाराष्ट्र के बाद सबसे अधिक मामले कर्नाटक (2,971) में दर्ज किए गए। इसके बाद मध्य प्रदेश (835), आंध्र प्रदेश (780), तमिलनाडु (503) और छत्तीसगढ़ (486) का स्थान रहा।

हालांकि आत्महत्याओं में सबसे अधिक वृद्धि कर्नाटक में दर्ज की गई, जहां 2023 की तुलना में मामलों में 22.61 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद राजस्थान में 14 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 7.46 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। दूसरी ओर, चौथे स्थान पर रहने वाले आंध्र प्रदेश में 2023 की तुलना में आत्महत्याओं में 15.67 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

पुडुचेरी में सबसे तेज वृद्धि

केंद्रशासित प्रदेशों में पुडुचेरी में 2019 से 2022 के बीच कृषि क्षेत्र में आत्महत्या का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था। लेकिन 2023 में यहां 10 मामले सामने आए, जो 2024 में बढ़कर 33 हो गए। इन सभी मामलों में मृतक कृषि मजदूर थे।

यह सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सबसे तेज वृद्धि रही, जहां एक वर्ष के भीतर कृषि क्षेत्र की आत्महत्याओं में 230 प्रतिशत यानी तीन गुना से अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई।