आगरा के स्टोरेज में आलू किसानों की भीड़, फोटो : फहीम खान 
कृषि

आलू का नया सीजन नजदीक, किसानों को पुरानी फसलों पर ही नहीं मिल रही लागत

आगरा में 70 हजार से अधिक हेक्टेयर में किसान आलू की पैदावार करते हैं। पिछले साल किसानों ने 26 से 30 मीट्रिक टन से अधिक आलू कोल्ड स्टोरेज में स्टोर किया था

Faheem Khan

आलू की बंपर पैदावार ने इस बार आलू की खेती करने वाले किसानों की कमर तोड़ दी है। पुराने आलू का स्टॉक गोदामों में भरा पड़ा है जबकि नए आलू का सीजन आ चुका है। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में शमसाबाद के किसान ओमकार सिंह प्रधान अपना यह दुखड़ा सुनाते हुए कहते हैं कि करीब 150 बीघा आलू की खेती करने के बाद सोचा था कि इस बार कुछ भला हो जाएगा लेकिन सब्जियों के राजा आलू ने अन्नदाता को रंक बना दिया है। वह बताते हैं, "एक बीघा में करीब 35 हजार की लागत आई और महज 10 से 12 हजार रुपए ही मिल रहे हैं। ऐसे में अब हम किसान कैसे अपना गुजर करें?"

आलू कारोबारियों और किसानों का कहना है कि पिछली बार की अपेक्षा इस बार 5-7 फीसदी आलू की पैदावार ज्यादा थी। दूसरा बंगाल में आलू ज्यादा होने की वजह से इसका असर यूपी पर पड़ा। तीसरा खोदाई के वक्त ही डंप ज्यादा होने के कारण बहुत दिनों तक खेतों में किए गए डंप से ही आलू की बिक्री हुई। एक माह देरी से कोल्ड खुले। अब एक साथ आलू बाहर आने लगा तो रेट बहुत डाउन हो गए हैं।

करीब 85 बीघा आलू की फसल करने वाले सत्यप्रकाश सरपंच बताते हैं कि पांच हजार पैकेट कोल्ड स्टोरेज में पड़ा है, जो आलू एक हजार प्रति क्विंटल बिकना चाहिए वह महज 300 से 350 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। इतना भाड़ा तो कोल्ड स्टोर में आलू रखने का ही हो गया। अब उस आलू को कैसे लेने जाएं, जिससे कुछ मिलना ही नहीं। अभी भी कोल्ड स्टोरों में 55 से 60 फीसदी आलू डंप है जबकि आलू की बुवाई का समय आ गया है।

फरवरी में आलू की फिर से खोदाई शुरू हो जाएगी, ऐसे में हम किसान आखिर क्या करें?
देशभर में आगरा आलू भंडार का गढ़ है और आगरा के आलू की धमक देश ही नहीं दुनिया के तमाम देशों तक पहुंच गई है, जिस हिसाब से आलू की बंपर पैदावार हुई है उस हिसाब से किसानों का भाव नहीं मिलने की वजह से किसानों की माली हालत खराब है। पुराना आलू अभी तक बिका नहीं है। कोल्ड स्टोरेज भरे हुए हैं और किसान अपने आलू को लेने तक नहीं जा रहे हैं। किसानों को पता है कि जितना भाड़ा कोल्ड स्टोर का हो गया है, उससे कम रेट पर तो आलू बिक रहा है। ऐसे में पहले से कर्जे में डूबा किसान को कोल्ड का भाड़ा भी अपनी जेब से ही देना होगा। इसलिए उसे निकालने के लिए नहीं जा रहे जबकि कोल्ड से लगातार उनके पास फोन पहुंच रहे हैं।

आगरा क्षेत्र में आलू की फसल का रकबा
आगरा में 70 हजार से अधिक हेक्टेयर में किसान आलू की पैदावार करते हैं। पिछले साल किसानों ने 26 से 30 मीट्रिक टन से अधिक आलू कोल्ड स्टोरेज में स्टोर किया था। किसानों की मानें तो एक हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों की लागत आई लेकिन मार्च-2026 से अक्तूबर-2026 तक आलू के भाव बाजार में नहीं चढ़े हैं। नतीजा ये हुआ कि वर्तमान समय में 55 से 60 फीसदी आलू कोल्ड स्टोरेज में पड़ा है, जिसे किसान उठाने तक नहीं आ रहे। बाजार में आलू के भाव 150 से 400 रुपये क्विंटल के बीच हैं।

जानकारों का कहना हैं कि अक्तूबर और नवंबर के महीने में 15 से 20 फीसदी के करीब कोल्ड स्टोरेज में रखा आलू बीज के लिए उपयोग आ जाएगा। 30 नवंबर को कोल्ड स्टोरेज बंद हो जाएंगे। ऐसे में बचे 35 से 40 फीसदी आलू का क्या होगा, इसे लेकर कोल्ड स्टोर संचालक से लेकर किसान तक परेशान हैं।

बीज के दाम छू रहे आसमान
उद्यान विभाग ने आलू बीज का मूल्य 3,630 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। इसमें यूपी सरकार की ओर से एक हजार रुपये सब्सिडी दी गई है। अब किसान को ये बीच 2,630 रुपये प्रति क्विंअल की दर से मिलेगा। ये बीज भी किसानों को आसानी से नहीं मिलेगा, इसमें भी सरकार ने पहले आओ, पहले पाओ की नीति को लागू कर दिया है, जिस कारण बहुत से किसान इस बीज से भी वंचित रह जाएंगे। आगरा जिले में पिछले साल महज 5,400 मीट्रिक टन बीज आवंटित हुआ था, जो आगरा क्षेत्र के हिसाब से बहुत कम था।

मौसम भी नहीं दे रहा किसानों का साथ
मुन्ना लाल सरपंच ने बताया कि आलू की बुवाई के लिए मौसम का साथ देना भी बहुत जरूरी है। कृषि विज्ञानिकों के अनुसार तो आलू की बुवाई के लिए दिन का तापमान 20 से 25 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 12 से 18 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए। आलू बुवाई के समय मिट्टी का तापमान करीब 15 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच होना लाजिमी है, लेकिन आगरा में अभी भी यानी अक्तूबर के महीने में दिन का तापमान 35 से 36 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 25 से 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा रहा है। इसके चलते किसान अभी तक अपने खेतों को तैयार तक नहीं कर पा रहे हैं।

आलू का गिरेगा क्षेत्रफल, घटेगी पैदावार
आलू व्यवसासी अजीम खान का कहना है कि बीते छह सालों से आलू की फसल किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। कोविड-19 में आए भाव के बाद आलू लगातार घाटे में बिक रहा है। बीते दो सालों से किसानों को लागत तक नहीं मिल रही है। ऐसे में नई फसल की बुवाई में किसान अपना हाथ पीछे खींच रहे हैं। पिछले साल की तुलना में इस साल क्षेत्रफल में कटौती कर रहे हैं। अभी तो खेत भी तैयार नहीं हुए हैं। ऐसे में सही आंकड़ा तो आलू की फसल बुवाई के बाद ही निकलकर आएगा। इसके पीछे आलू में बढ़ती लागत प्रमुख कारण बनकर उभर रही है।

भेज यानी किराए पर खेत लेकर फसल करने वालों को बीते साल बड़ा घाटा है। वे इस घाटे से उभर नहीं पा रहे हैं। प्रगतिशील किसानों का कहना हैं कि आगरा में आलू अनुसंधान की शाखा खुलने के बाद किसानों के हाथ में पर्याप्त बीज होगा। ये मील का पत्थर साबित होगा।

700 रुपये प्रति क्विंटल नुकसान
शमसाबाद के प्रगतिशील किसान ओमकार सिंह प्रधान बताते हैं इस बार तो खाद, बीज, पानी और भाड़े तक के पैसे नहीं निकल रहे। इसमें 70 बीघा तो खेती भेज पर ही ली थी, ऐसे में इन खेत मालिकों के भी कर्जदार हो गए। इस घाटे को पूरा करने में कई साल लगेंगे। डीएपी-यूरिया के लिए नकद धनराशि नहीं है। उन्होंने बताया कि कम से कम एक क्विंटल पर एक हजार रुपये की लागत आ रही है। ऐसे में किसान को कम से कम 700 रुपये का नुकसान प्रति क्विंटल हो रहा है।

मौसम की वजह से पिछड़ गईं फसलें
उद्यान विभाग के अनुसार रबी के सीजन में तीनों फसलों की बुवाई का समय निर्धारित है। रबी के सीजन में आगरा के किसान आलू, गेहूं और सरसों की पैदावार करते हैं। आलम ये है कि अक्तूबर की गर्मी के कारण खेत भी आलू के लिए तैयार नहीं हो पा रहे हैं। जबकि, 15 अक्तूबर से आलू की बुवाई शुरू होनी है। लेट बुवाई से आलू पिछाई की श्रेणी में आएगा। आगरा क्षेत्र में तीनों ही फसलों का क्षेत्रफल बड़ा है। 70 से 75 हजार हेक्टेयर में आलू, 65 हजार हेक्टेयर में सरसों और 1.32 लाख हेक्टेयर में गेहूं की पैदावार होती है। 15 सितंबर से 15 अक्तूबर तक सरसों की बुवाई होती है। 15 अक्तूबर से 31 अक्तूबर तक आलू की बुवाई का समय है। एक नवंबर से 15 दिसंबर तक गेहूं की पैदावार का सही समय माना जाता है। वे बताते हैं कि मौसम के कारण तीनों ही फसलें अपने निर्धारित समय से पिछड़ गई हैं।

11 हजार रुपये प्रति बीघा भेज पर लिया खेत
गांव शेखूपुर के प्रगतिशील किसान दीपक सिसौदिया ने बताया कि 270 बीघा खेती है। 40 से 50 लाख का नुकसान था। कर्ज लेकर खेती थी इसमें मुनाफा तो छोड़िए खर्चा भी नहीं निकल रहा। ऐसे में सरकार से उम्मीद थी भावांतर योजना के तहत कुछ नुकसान की भरपाई कर दे लेकिन महज सौ रुपये प्रति क्विंटल का पैसा दे रही है। (वो भी अधिकतम 200 क्विंटल पर ही इस योजना का लाभ दिया जाएगा )। दीपक कहते हैं कि 270 बीघा खेती 11 हजार रुपये प्रति बीघा भेज पर ली थी। खेत मालिक को तो पूरा पैसा पहले ही दे चुके हैं। बहुत सारा कर्जा लिया था अब इसे कैसे चुकाएं ये समझ में नहीं आ रहा।

कोल्ड स्टोर संचालकों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा
मोहम्मदाबाद स्थित एचएल जैन कोल्ड स्टोर के स्वामी प्रिंस जैन का कहना है कि कि इस बार कोल्ड स्टोर संचालकों से लेकर किसानों तक को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। सरकार का आदेश 30 नवंबर तक कोल्ड स्टोर बंद करने का है। ऐसे में अगर कोल्ड बंद हो गए और किसान समय से आलू निकासी को नहीं आए तो 30 से 35 फीसदी आलू फिकेगा। कोल्ड स्टोर संचालकों को आलू का भाड़ा भी नहीं मिल रहा। हम भी किसानों पर जोर नहीं डाल सकते कि वे पहले से ही नुकसान में हैं।

वह कोल्डस्टोरेज के बोझ का गणित समझाते हैं कि कोल्ड स्टोर का भाड़ा 145 रुपये से लेकर 150 रुपये प्रति पैकेट (एक पैकेट में 50 केजी वजन) है। बेबी पोटेटो यानी किर्री 50 से 70 रुपये प्रति पैकेट है और टेबिल पोटेटो यानी गुल्ला 150 से 225 रुपये प्रति पैकेट है जबकि हाइब्रिड पोटेटो 300 से 400 रुपये प्रति पैकेट है। इसके अलावा 3797 ग्रेड 300 से 550 रुपये प्रति पैकेट है। जबकि इसमें अभी कोल्ड स्टोर का 300 रुपये प्रति क्विंटल का भाड़ा अलग से देना होता है। यह मार आलू किसानों की दुर्दशा करने के लिए काफी है।