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कृषि

न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम भाव पर बिक रही हैं ज्यादातर फसलें

मोटे अनाजों में शामिल और सरकार द्वारा प्रोत्साहित रागी, मक्का और बाजरा का भाव सबसे अधिक गिरा हुआ है

Bhagirath

सारांश

  • क्रॉप वेदर वाच ग्रुप की ताजा साप्ताहिक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि 12 फसलों का थोक मूल्य एमएसपी से कम है।

  • इन 12 फसलों में गेहूं, मक्का, अरहर, चना, मसूर, मूंग, उड़द, ज्वार, बाजरा, रागी, मूंगफली और सूरजमुखी शामिल हैं।

  • रागी अपने न्यूनतम समर्थन मूल्य 4,886 रुपए प्रति क्विंटल से 36.72 प्रतिशत कम यानी 3,092 प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है।

  • एक आढ़ती के अनुसार, चना 5,000 रुपए प्रति क्विंटल और रबी की सबसे अहम फसल गेहूं का भाव 2,100 से 2,000 रुपए प्रति क्विंटल है

रबी सीजन 2026 के लिए निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम भाव पर अधिकतर फसलें बिक रही हैं, जिससे किसानों को लागत निकालनी मुश्किल हो रही है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के क्रॉप वेदर वाच ग्रुप की ताजा साप्ताहिक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि 12 फसलों का थोक मूल्य एमएसपी से कम है। इन 12 फसलों में गेहूं, मक्का, अरहर, चना, मसूर, मूंग, उड़द, ज्वार, बाजरा, रागी, मूंगफली और सूरजमुखी शामिल हैं।

मोटे अनाजों में शामिल और सरकार द्वारा प्रोत्साहित रागी, मक्का और बाजरा का भाव सबसे अधिक गिरा हुआ है। रागी अपने न्यूनतम समर्थन मूल्य 4,886 रुपए प्रति क्विंटल से 36.72 प्रतिशत कम यानी 3092 प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है। इसी तरह मक्का 2,400 रुपए के मुकाबले 1,689 रुपए और बाजरा 2,775 के मुकाबले 2,161 रुपए प्रति क्विंटल के थोक भाव पर बिका है। मक्का अपने न्यूनतम समर्थन मूल्य से 29.63 प्रतिशत और बाजरा 22.13 प्रतिशत कम भाव पर बिक रहा है।

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के बारीगढ़ कस्बे में एक आढ़ती राजेश शिवहरे ने डाउन टू अर्थ को बताया कि चना इस वक्त 5,000 रुपए प्रति क्विंटल और रबी की सबसे अहम फसल गेहूं का भाव 2,100 से 2,000 रुपए प्रति क्विंटल है। यानी चना 5,875 रुपए की एमएसपी से 875 रुपए कम और गेहूं 2,585 रुपए एमएसपी से करीब 600 रुपए कम भाव पर बिक रहा है।

उत्तर प्रदेश बांदा जिले में रहने वाले स्थानीय पत्रकार अशोक निगम ने बताया कि एमएसपी पर सरकारी खरीद न होने से किसानों को औने पौने भाव पर अपनी उपज बेचनी पड़ रही है क्योंकि उन्हें कटाई, लेबर, सिंचाई आदि का भुगतान शीघ्र करना है। वह यह भी बताते हैं कि गेहूं में बेमौसम बरसात के कारण नमी है, जिसके कारण सरकारी खरीद में अड़चन आ रही है। अशोक निगम कहते हैं कि फसलों का भाव इतना कम है कि किसानों की लागत नहीं निकल पा रही है।

बहुत से किसान ऐसे हैं जो भाव कम होने के कारण अपनी उपज मंडी में ले जाने से कतरा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के पुपवारा गांव के किसान बिंद्रावन ने डाउन टू अर्थ को बताया कि उन्होंने इस साल अपने खेतों में सफेद मटर लगाया था जो इस वक्त 3,000 रपए प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है, जबकि यही मटर पिछले वर्ष 4,500-5,000 रुपए क्विंटल के भाव बिका था। वह कहते हैं कि इस भाव पर फसल बेचने से कोई फायदा नहीं है। वह और उनके आसपास के गांवों के अधिकांश किसान खरेला कस्बे में निजी व्यापारी (आढ़ती) को अपनी उपज बेचते हैं क्योंकि सरकारी मंडी उनके गांव से दूर है और फसल को सरकार मंडी तक ले जाने की लागत ज्यादा है।  

महोबा की अनाज मंडी में आढ़ती घनश्याम ने डाउन टू अर्थ को बताया कि अचानक आवक से सभी फसलों का भाव कम हो गया है। उनका कहना है कि केवल सरसों का ही भाव सबसे अच्छा है जो इस वक्त 6,200-6,600 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रही है। पूरी मंडी में यही फसल है जो एमएसपी या उससे अधिक भाव पर बिक रही है।