आईसीएआर द्वारा विकसित 73 गेहूं और 15 चावल की जैव-संवर्धित किस्में पोषण और स्वास्थ्य सुधार में सहायक। प्रतीकात्मक छवि, फोटो साभार: आईस्टॉक
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संसद में आज: कुपोषण से जीत हासिल करने में सहायक होंगी गेहूं की 73 व धान की 15 किस्में

आज 10 फरवरी, 2026 को लोकसभा व राज्यसभा में कृषि, जैविक खेती, बीज, नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े मुद्दों पर उठाए गए प्रश्नों का केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रियों द्वारा उत्तर दिया गया।

Madhumita Paul, Dayanidhi

  • आंध्र प्रदेश में पीकेवीवाई के तहत 5300 जैविक क्लस्टर, 91,753 किसान शामिल, 38,097 हेक्टेयर क्षेत्र कवर।

  • हिसार, हरियाणा में खरीफ 2025 बाढ़ से फसल नुकसान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से 41.09 करोड़ रुपये जारी।

  • महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में बीज ग्राम कार्यक्रम से 2024-25 में कुल 6.23 लाख से अधिक किसान लाभान्वित।

  • आईसीएआर द्वारा विकसित 73 गेहूं और 15 चावल की जैव-संवर्धित किस्में पोषण और स्वास्थ्य सुधार में सहायक।

  • नमो ड्रोन दीदी, समुद्री शैवाल खेती, नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन से सतत विकास को बढ़ावा।

आंध्र प्रदेश में जैविक खेती और किसान क्लस्टर

जैविक खेती को लेकर सदन में उठाए गए के सवाल के जवाब में आज, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में बताया कि आंध्र प्रदेश में परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीयाई) के तहत जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। योजना की शुरुआत से अब तक राज्य में 5300 किसान क्लस्टर बनाए गए हैं।

एक अप्रैल, 2024 से 31 दिसंबर 2025 तक इस योजना के अंतर्गत 91,753 किसानों को शामिल किया गया है और लगभग 38,097 हेक्टेयर क्षेत्र को जैविक खेती के अंतर्गत लाया गया है। केंद्र सरकार ने इस अवधि में राज्य को 57.46 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिनमें से 28 करोड़ रुपये का उपयोग किया जा चुका है।

इसके अलावा 33,300 किसान पीजीएस-इंडिया जैविक प्रमाणन प्रणाली के अंतर्गत पंजीकृत हैं। इनमें से 15,433 किसानों को जैविक प्रमाण पत्र मिल चुका है, जबकि 17,867 किसान प्रमाणन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में हैं। यह पहल रासायनिक खेती को कम करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में मदद कर रही है।

हरियाणा के हिसार में बाढ़ से फसल नुकसान

सदन में पूछे गए एक और प्रश्न के उत्तर में आज, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि हरियाणा के हिसार संसदीय क्षेत्र में खरीफ 2025 के दौरान बाढ़ के कारण फसलों को नुकसान हुआ। हालांकि, रबी 2025-26 के मौसम में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

राज्य सरकार द्वारा समय पर सर्वे कर नुकसान का आकलन किया गया और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीयाई) के तहत किसानों को मुआवजा दिया गया। खरीफ 2025 में जलभराव और बाढ़ से प्रभावित किसानों को 41.09 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई। इससे किसानों को आर्थिक राहत मिली।

महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में बीज ग्राम कार्यक्रम

सदन में सवालों का सिलसिला जारी रहा, एक सवाल के जवाब में आज, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि बीज ग्राम कार्यक्रम को पहले बीज एवं रोपण सामग्री उप-मिशन (एसएमएसपी) के तहत चलाया जा रहा था। अब इसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (एनएफएसएनएम) का हिस्सा बना दिया गया है।

यह कार्यक्रम अब “नई किस्मों के बीज उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु सहायता” के रूप में लागू किया जा रहा है। यह योजना महाराष्ट्र के 34 जिलों व मध्य प्रदेश के 55 जिलों में लागू है।

साल 2024-25 में महाराष्ट्र में 3,39,551 किसान इस योजना से लाभान्वित हुए, जिनमें छत्रपति संभाजी नगर जिले के 12,548 किसान शामिल हैं। वहीं मध्य प्रदेश में 2,84,250 किसानों को इस योजना का लाभ मिला। इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता के बीज उपलब्ध हो रहे हैं।

जैव-संवर्धित गेहूं और चावल

सदन में उठे एक प्रश्न के उत्तर में आज, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने लोकसभा में बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अंतर्गत राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली ने पिछले दस वर्षों में कई पोषण युक्त फसल किस्में विकसित की हैं।

इनमें गेहूं की 73 किस्में, जो आयरन, जिंक और प्रोटीन से भरपूर हैं। धान की 15 किस्में, जो जिंक और प्रोटीन से समृद्ध हैं। ये फसलें देश में कुपोषण कम करने में सहायक होंगी।

समुद्री शैवाल (सीवीड) खेती

सदन में उठाए गए एक सवाल का जवाब देते हुए आज, मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में बताया कि भारत की 11,099 किलोमीटर लंबी तटरेखा समुद्री शैवाल की खेती के लिए बहुत उपयुक्त है।

देश के तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 384 संभावित स्थानों की पहचान की गई है, जिनका कुल क्षेत्रफल 24,707 हेक्टेयर है। इसमें आंध्र प्रदेश भी शामिल है। समुद्री शैवाल खेती से तटीय क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा।

महाराष्ट्र में बाढ़ से प्रभावित किसानों को मुआवजा

किसानों को मुआवजे को लेकर सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में कहा कि जून से सितंबर 2025 के बीच महाराष्ट्र में भारी बारिश और बाढ़ के कारण 98.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ। इससे 34 जिलों के 120.83 लाख किसान प्रभावित हुए।

राज्य सरकार ने सर्वे कर 9,700.87 करोड़ रुपये की राहत और मुआवजा राशि स्वीकृत की। इसके अलावा, रबी फसल के लिए बीज और कृषि आदानों हेतु प्रति हेक्टेयर 10,000 रुपये (अधिकतम तीन हेक्टेयर तक) की सहायता दी गई। इसके लिए 9,611.17 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए।

नमो ड्रोन दीदी योजना

सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, ग्रामीण विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने बताया कि केंद्र सरकार ने “नमो ड्रोन दीदी योजना” को केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में मंजूरी दी है। इसका कुल बजट 1,261 करोड़ रुपये है और यह योजना 2023-24 से 2025-26 तक चलेगी।

साल 2023-24 में 1,094 ड्रोन महिला स्वयं सहायता समूहों को दिए गए। इनमें से 500 ड्रोन विशेष रूप से नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत किसानों को किराये पर सेवाएं देने के लिए दिए गए हैं। इन ड्रोन का उपयोग नैनो उर्वरकों के छिड़काव में किया जा रहा है।

देश में नवीकरणीय ऊर्जा की प्रगति

सदन में उठे एक प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा विद्युत मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने राज्यसभा में बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश में 135.81 गीगावाट सौर ऊर्जा और 54.51 गीगावाट पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता है। भारत नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों की ओर तेजी से बढ़ रहा है, हालांकि भूमि अधिग्रहण, ट्रांसमिशन और वित्तीय चुनौतियां भी हैं।

राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन

सदन में पूछे गए एक और सवाल के जवाब में आज, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा विद्युत मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि भारत सरकार राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को लागू कर रही है। इसका लक्ष्य साल 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन की उत्पादन क्षमता को स्थापित करना है। इसका उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन का वैश्विक केंद्र बनाना है।