फाइाल फोटो: श्रीकांत चौधरी 
कृषि

सरकारी खरीद सुस्त, एमएसपी से नीचे बिक रहा गेहूं; किसानों को मंडियों में नहीं मिल रहा उचित दाम

सरकारी खरीद लक्ष्य से काफी पीछे, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीददारी बहुत कम हो रही है, जबकि गेहूं की कटाई लगभग पूरी हो चुकी है

Raju Sajwan

एक ओर जहां सरकार गेहूं नहीं खरीद रही है, दूसरी ओर किसानों को मंडियों में भी गेहूं का दाम सही नहीं मिल रहा है। देश की प्रमुख खाद्यान्न फसल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल है, जबकि मंडियों में इसका औसत भाव 2479 रुपए प्रति क्विंटल है।

देश में रबी सीजन 2025-26 में 334.17 लाख हेक्टेयर में गेहूं लगाया गया था। कृषि मंत्रालय के क्रॉप डिवीजन के आंकड़ों के मुताबिक 8 मई 2026 तक 98 फीसदी गेहूं की फसल काटी जा चुकी है। उत्तर प्रदेश व पंजाब में 98 फीसदी फसल कट चुकी है, शेष राज्यों में 100 फीसदी फसल कट चुकी है। 

बावजूद इसके मंडियों में गेहूं की खरीद नहीं हो पा रही है। भारतीय खाद्य निगम के आंकड़ों के अनुसार रबी विपणन सत्र 2026-27 के लिए गेहूं खरीद का अनुमान 3 करोड़ 44 लाख 97 हजार टन रखा गया है। इसके मुकाबले अब तक 2 करोड़ 17 लाख 9 हजार 470 टन गेहूं की खरीद हो सकी है। 

इसका मतलब है कि अब तक अनुमानित खरीद का लगभग 63 प्रतिशत ही हासिल हो पाया है। पंजाब में गेहूं खरीद का अनुमान 1 करोड़ 22 लाख टन रखा गया था, जिसके मुकाबले अब तक 1 करोड़ 5 लाख 14 हजार 709 टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है। यानी पंजाब अपने अनुमानित लक्ष्य का लगभग 86 प्रतिशत हासिल कर चुका है। 

लेकिन हरियाणा इस बार पिछड़ रहा है। हरियाणा में 72 लाख टन के अनुमान के मुकाबले अब तक केवल 25.88 लाख टन गेहूं की खरीद हो सकी है, जो लक्ष्य का करीब 36 प्रतिशत है।

उत्तर प्रदेश में 25 लाख टन गेहूं खरीद के अनुमान के मुकाबले अब तक 12.08 लाख टन की खरीद हुई है, जो लक्ष्य का करीब 48 प्रतिशत है। मध्य प्रदेश में 1 करोड़ टन गेहूं खरीद के अनुमान के मुकाबले अब तक 57.34 लाख टन की खरीद हुई है, जो लक्ष्य का लगभग 57 प्रतिशत है।

राजस्थान में 23.50 लाख टन गेहूं खरीद के अनुमान के मुकाबले अब तक 16.25 लाख टन की खरीद हुई है, जो लक्ष्य का करीब 69 प्रतिशत है। 

किसान नेता धर्मेंद्र मलिक का कहना है कि बफर स्टॉक अधिक होने के कारण केंद्र सरकार गेहूं खरीदना ही नहीं चाहती, इसलिए सरकार ने पहले ही लक्ष्य कम कर दिया था। दूसरा, इस साल उत्पादन भी कम होने की उम्मीद है। हालांकि सरकार ने दावा किया था कि इस साल गेहूं का उत्पादन ज्यादा होगा। यही वजह है कि सरकार ने गेहूं का निर्यात भी खोल दिया था। 

सरकारी खरीद न होने के कारण किसानों से गेहूं भी कम कीमत पर खरीदा जा रहा है। हालांकि मलिक दावा करते हैं कि अगले महीने गेहूं की कीमतों में तेजी आ जाएगी, लेकिन तब तक ज्यादातर गेहूं किसानों से खरीद लिया जाएगा और व्यापारियों के पास पहुंच चुका होगा।

एमएसपी से कम पर बिक रही हैं ज्यादातर फसलें 

गेहूं ही नहीं कई प्रमुख कृषि जिंसों का थोक भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे चल रहा है। कृषि मंत्रालय के अंतर्गत क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप (सीडब्ल्यूडब्ल्यूजी) की 11 मई 2026 की साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार धान, गेहूं, मक्का, अरहर, दालें और तिलहनों सहित कई फसलों के बाजार भाव एमएसपी से कम दर्ज किए गए हैं।

आंकड़ों के अनुसार बाजरा का औसत मंडी भाव एमएसपी से 25.55 प्रतिशत नीचे रहा। बाजरा का एमएसपी 2775 रुपए प्रति क्विंटल तय है, जबकि मंडियों में इसका औसत भाव 2066 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।

इसी तरह सूरजमुखी का एमएसपी  7721 रुपए प्रति क्विंटल है, लेकिन बाजार में यह औसतन 5870 रुपए प्रति क्विंटल बिका, जो एमएसपी से 23.97 प्रतिशत कम है।

इसी तरह मक्का का एमएसपी 2400 रुपए प्रति क्विंटल है, जबकि मंडी भाव 1889 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज हुआ, यानी 21.29 प्रतिशत कम। दालों में मूंग का भाव एमएसपी से 13.82 प्रतिशत नीचे रहा। मूंग का एमएसपी 8768 रुपए प्रति क्विंटल है, जबकि बाजार भाव 7556 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। उड़द 10.69 प्रतिशत और चना 9.65 प्रतिशत नीचे बिक रहा है। धान (अनमिल्ड राइस) का भाव भी एमएसपी से 4.81 प्रतिशत नीचे दर्ज किया गया।