कृषि

फार्मर आईडी: जमीन रिकॉर्ड और नाम में त्रुटियों से जूझ रहे बिहार के किसान

किसानों को जमीन की जमाबंदी रसीद पर खाता-खसरा गायब होने, लाभुक और उनके पिता के नाम में त्रुटि होने, पूर्वजों के नाम पर जमीन का रसीद होने और भूमि का दाखिल-खारिज न होने जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।

Rahul Kumar Gaurav

  • बिहार में किसानों के लिए फार्मर आईडी बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

  • जमीन के रिकॉर्ड में त्रुटियों और नाम के असंगतियों के कारण कई किसान सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

  • सरकार ने विशेष अभियान चलाकर इस समस्या को हल करने की कोशिश की है, लेकिन जमीनी हकीकत में सुधार की आवश्यकता है।

बिहार सरकार किसानों का डिजिटल पहचान पत्र बनवा रही है। यह किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि और कृषि योजनाओं का लाभ देने की योजना है। सरकार का दावा है कि इससे सभी योजनाओं तक किसानों की आसान और पारदर्शी पहुंच सुनिश्चित होगी।

बिहार में लगभग 85 लाख से अधिक किसान पंजीकृत हैं, लेकिन कृषि विभाग के मुताबिक अब तक पीएम किसान सम्मान के लिए सिर्फ 29 लाख किसानों का निबंधन हुआ है। यानी करीब एक तिहाई किसानों की ही आईडी बन पाई है। वैसे 65 लाख से अधिक किसानों का ई-केवाईसी हुआ है। चूंकि अब केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ प्राप्त करने वाले सभी किसानों के लिए फार्मर आईडी को अनिवार्य कर दिया है। फरवरी महीने में पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त के रूप में 2,000 रुपए पात्र किसानों के खाते में आने वाले हैं। ऐसे में कई किसानों को नुकसान होगा।

सुपौल जिला स्थित वीना पंचायत के रहने वाले अशोक मिश्रा बताते हैं, “आधार कार्ड में नाम है अशोक कुमार झा और जमीन के रसीद में अशोक झा। ऐसे में दिक्कत हो रही है। हालांकि बोला गया है सुधार हो जाएगा। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो कुछ दिनों तक सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। प्रशासन से मांग की है कि दस्तावेज सुधार की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।”

वीना पंचायत के ही पेशे से वकील और किसान बिंदु नाथ झा बताते हैं,"संयुक्त परिवार में एक ही जमाबंदी में कई सदस्यों का नाम दर्ज होने के कारण सिस्टम में मिलान नहीं हो पा रहा है। कुछ महीने पहले गांव में कैंप लगाकर जमाबंदी फूट अलग-अलग नाम से जमाबंदी कराने और कागजात सुधारने की प्रक्रिया चलाई गई थी। बावजूद इसके आज भी अधिकांश मामलों में जमाबंदी जस की तस पड़ी हुई है। पहले व्यापक स्तर पर जमाबंदी सुधार व फूट की प्रक्रिया पूरी की जाए, उसके बाद ही फार्मर आइडी निर्माण कार्य कराया जाए। बिना जमाबंदी की समस्या सुलझाए यह अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा।" 

सहरसा जिला स्थित महिषी प्रखंड के रहने वाले नितिन ठाकुर बताते हैं, “ग्रामीण ढांचे की हकीकत यह है कि अधिकांश जमीन पैतृक हैं और जमाबंदी कई बार पूर्वज या दिवंगत पिता के नाम पर हैं। इन जमीनों पर उत्तराधिकारी वर्षों से खेती कर रहे हैं, लेकिन कई मामलों में दाखिल-खारिज नहीं हो पाया है। जब ऐसे किसान आईडी कार्ड या योजनाओं के लिए शिविरों में पहुंचते हैं, तो उन्हें यह कहकर लौटा दिया जाता है कि आपके नाम पर जमाबंदी नहीं है। अंग्रेजी में नाम सही है, लेकिन हिंदी में एक अक्षर की गलती के कारण फार्मर आईडी नहीं बन रही।"

गांव के विकास के क्षेत्र में कई अवॉर्ड जीत चुकी पूर्व मुखिया रितु जायसवाल इस मुद्दे पर कहती हैं, ”उन्हीं किसानों की फार्मर आईडी बन रही है, जिनके नाम से खुद की जमाबंदी है। बिहार में अधिकतर जमीन पैतृक है। कई मामलों में जमाबंदीदार का निधन हो चुका है और उत्तराधिकारी खेती कर रहे हैं, लेकिन उनकी फॉर्मर रजिस्ट्री आईडी नहीं बनाई जा रही है। ऐसे किसान कैम्प से खाली हाथ लौट रहे हैं।” वहीं कई किसान शिकायत कर रहे हैं कि ऑनलाइन पोर्टल में तकनीकी दिक्कतें हैं और प्रक्रिया जटिल है।

पूर्व कृषि पदाधिकारी अरुण कुमार झा बताते हैं कि, "कई किसानों की जमीन पुरानी गूंज-बहियों और माप पुस्तिकाओं में दर्ज है, लेकिन आधुनिक ऑनलाइन रिकॉर्ड में उनका नाम शामिल नहीं है। इस स्थिति से निपटने के लिए जरूरी है कि पुरानी रजिस्ट्री को डिजिटल रूप में अपडेट करे और असमर्थ किसानों के लिए वैकल्पिक सत्यापन प्रक्रिया अपनाएं। तभी छोटे और सीमांत किसान योजनाओं का लाभ समय पर ले सकेंगे।”

किसानों को जमीन की जमाबंदी रसीद पर खाता-खसरा गायब होने, लाभुक और उनके पिता के नाम में त्रुटि होने, पूर्वजों के नाम पर जमीन का रसीद होने और भूमि का दाखिल-खारिज न होने जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। परिमार्जन (सुधार) की प्रक्रिया भी किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। बिहार के कई गांवों में फार्मर आईडी बनवाने में भारी परेशानी हो रही है। 

फार्मर आईडी कार्ड बनाने के लिए बिहार सरकार ने विशेष अभियान शुरू किया है। सभी पंचायतों में फार्मर रजिस्ट्री का कार्य कैंप लगाकर किया गया है। प्रथम चरण का कैंप 6 जनवरी से 11 जनवरी तक एवं द्वितीय चरण का कैंप 17 जनवरी से 21 जनवरी तक आयोजित किया गया है। कृषि विभाग के मुताबिक किसान जरूरी कागजात लेकर इन कैंपों में पहुंचे। वहां कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार या हलका कर्मचारी से संपर्क करें। किसान को फार्मर रजिस्ट्री पोर्टल या ऐप पर बायोमेट्रिक या फेस ऑथेंटिफिकेशन से सत्यापन करना होगा। इसके बाद जमीन से संबंधित दावा दर्ज करें। राजस्व विभाग के कर्मचारी सत्यापन पूरा करने पर फार्मर आईडी जारी कर देंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, “फार्मर आईडी बनाने की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी। जिला प्रशासन किसी भी पात्र किसान को इस सुविधा से वंचित नहीं रखेगा।” 

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने मीडिया से बात करते हुए इस मुद्दे पर कहा कि बिहार में जमीन से संबंधित मालिकाना हक अभी भी काफी संख्या में पूर्वजों के नाम पर हैं। इसलिए कम निबंधन हुए हैं। लेकिन, किसानों का निबंधन अभी जारी रहेगा। पीएम सम्मान निधि योजना के सभी लाभुकों का हर हाल में निबंधन किया जाएगा। जल्द ही और विशेष अभियान की घोषणा की जाएगी। अगर समय रहते इसमें सुधार नहीं हुआ तो यह योजना लाभ से ज्यादा विवाद का कारण बन सकती है।