गुजरात में कुल मिलाकर सामान्य से 16 प्रतिशत कम बारिश हुई, लेकिन सौराष्ट्र-कच्छ के कई जिलों में स्थिति बेहद गंभीर है।
सौराष्ट्र के देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ में बारिश 10 प्रतिशत से भी कम हुई है।
सौराष्ट्र के 141 और कच्छ के 20 जलाशयों में भंडारण तेजी से घट चुका है। कई बांध पूरी तरह सूख गए हैं।
सौराष्ट्र में पाइपलाइन के जरिए नर्मदा का पानी पहुंचाए जाने के लिए बनाई गई गुजरात सरकार की 18 हजार करोड़ रुपए की सौनी योजना का लाभ फिलहाल किसानों ने मिल पा रहा है।
नर्मदा बेसिन में सामान्य से अधिक पानी होने के बावजूद सौनी योजना से सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा जा रहा, जिससे किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं और विरोध बढ़ रहा है।
किसान व विपक्षी दल सूखा घोषित करने की मांग कर रहे हैं।
हालात बिगड़ते देख सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन अभी सरकार की प्राथमिकता पीने के पानी व पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराना है।
वर्तमान मॉनसून सीजन में वैसे तो गुजरात में सामान्य से 16 प्रतिशत कम बारिश हुई है, लेकिन सौराष्ट्र-कच्छ में हालात बिगड़ चुके हैं। सौराष्ट्र के जिले देवभूमि द्वारका में सामान्य से 88 प्रतिशत, पोरबंदर में 73 प्रतिशत, कच्छ में 61 प्रतिशत और जामनगर में 60 प्रतिशत कम बारिश ही हुई है। इसके अलावा गिर सोमनाथ में 39 प्रतिशत, जूनागढ़ में 37 प्रतिशत और राजकोट में भी 33 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। बावजूद इसके, अब तक सरकार ने इन इलाकों में सूखा घोषित नहीं किया है।
सौराष्ट्र के पांच तालुका में तो हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि इस सीजन में एक जून से 3 सितंबर 2026 के दौरान सामान्य से दस प्रतिशत से भी कम बारिश हुई है, जबकि कच्छ के एक तालुका अबडासा में 10.28 प्रतिशत ही बारिश हुई है। सौराष्ट्र के देवभूमि द्वारका जिले के द्वारका तालुका में मात्र 2.28 प्रतिशत बारिश हुई है। इस तालुका में सामान्य 657 मिमी के मुकाबले महज 15 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है।
वहीं कल्याणपुर में 967 मिमी के मुकाबले 33 मिमी मात्र 3.41 प्रतिशत बारिश हुई है। खंभालिया में सामान्य 954 मिमी के मुकाबले 91 मिमी (9.54 प्रतिशत) भाणवड़ में 790 मिमी के मुकाबले 77 मिमी (9.75 प्रतिशत) और पोरबंदर में 803 मिमी के मुकाबले मात्र 75 मिमी (9.34 प्रतिशत) बारिश हुई। इन दोनों तालुकों में क्रमशः 713 और 728 मिमी बारिश की कमी रही।
जलाशय हो रहे खाली
बारिश न होने से सौराष्ट्र-कच्छ के बांधों (जलाशयों) में पानी काफी कम हो गया है। बारिश की कमी का सीधा असर सौराष्ट्र और कच्छ के जलाशयों पर पड़ा है। यह जानकारी गुजरात जल संसाधन विभाग की 3 सितंबर 2026 की “रिजर्वायर स्टोरेज स्टेटस ” रिपोर्ट के मुताबिक 3 सितंबर 2026 तक सौराष्ट्र के 141 जलाशयों में कुल भंडारण क्षमता का केवल 50.68 प्रतिशत पानी बचा था, जबकि उपयोग योग्य यानी जीवित भंडारण 48.96 प्रतिशत था। कच्छ के 20 जलाशयों की स्थिति इससे भी खराब रही, जहां कुल भंडारण 24.31 प्रतिशत और जीवित भंडारण महज 18.77 प्रतिशत था।
तीन तरफ से अरब सागर से घिरे सौराष्ट्र में संकट सबसे ज्यादा पश्चिमी जिलों में दिखाई देता है। देवभूमि द्वारका के जलाशयों में सिर्फ 0.85 प्रतिशत, जामनगर में 9.09 प्रतिशत और पोरबंदर में 19.78 प्रतिशत पानी था। जूनागढ़ में भी जलाशय केवल 22.49 प्रतिशत भरे थे। कई जलाशय पूरी तरह सूख चुके हैं। देवभूमि द्वारका के गढ़की, सानी और सिंधाणी, जामनगर के रूपावती, वोडीसांग और फुलजार-II, जूनागढ़ के प्रेमपारा तथा पोरबंदर के सोरठी और अडवाना में भंडारण शून्य दर्ज किया गया।
कच्छ में भी स्थिति गंभीर है। गजोड़, सनंद्रो और कैला जैसे जलाशयों में पानी 3 प्रतिशत के आसपास या उससे भी कम है। यह स्थिति उस समय है जब राज्य के प्रमुख सरदार सरोवर जलाशय में करीब 88.9 प्रतिशत पानी उपलब्ध था। यानी गुजरात में पानी की उपलब्धता और सौराष्ट्र-कच्छ में पानी की पहुंच के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।
जलाशयों में नर्मदा का पानी छोड़ने की मांग
खेतों में लगाई गई खरीफ की फसलें बर्बाद होते देख किसान नाराज हैं। 6 अगस्त 2026 को देवभूमि द्वारका के 27 गांवों के किसानों ने एक बैठक कर मांग की कि साउनी योजना के तहत सानी बांध में पानी छोड़ा जाए। साउनी योजना का पूरा नाम सौराष्ट्र नर्मदा अवतरण सिंचाई योजना है। मोवाणा गांव में हुई बैठक में सानी नदी के किनारे आने वाले विजलपर से सूर्यापर तक के 20 गांवों तथा गढ़ की केमना क्षेत्र के सात गांवों के किसान शामिल हुए। किसानों का कहना था कि बारिश न होने के कारण खरीफ की फसल को नुकसान हो रहा है।
अगस्त के दूसरे सप्ताह में डाउन टू अर्थ संवाददाता ने सौराष्ट्र के सुरेंद्र नगर, राजकोट, देवभूमि द्वारका, जामनगर के कई गांवों में जाकर देखा कि किसानों ने जुलाई के मध्य में जो फसलें लगाई थी और वो पूरी तरह सूख चुकी हैं। इनमें से कई गांवों में आसपास के बांधों से सिंचाई के लिए पानी मिलता है, लेकिन बांधों में पानी या तो सूख गया है या पानी बहुत कम हो गया है। इस वजह से किसान सौनी योजना का पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं।
क्या है सौनी योजना?
दरअसल सौराष्ट्र में लगभग 71 नदियां हैं, जो मध्य क्षेत्र से समुद्र की ओर बहती हैं। इन नदियों की लंबाई सामान्यतः कम है और इनमें अचानक बाढ़ आने की प्रवृत्ति है। क्षेत्र की अधिकांश नदियां मौसमी हैं और इनमें सालभर पानी नहीं रहता। शेत्रुंजी और भादर नदियों को छोड़कर अधिकांश नदियां मानसून के बाद सूख जाती हैं। इसलिए क्षेत्र में सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से पानी पहुंचाया जाता है, जिनमें सौनी योजना एक प्रमुख परियोजना है।
इसका उद्देश्य नर्मदा के बाढ़ के समय उपलब्ध अतिरिक्त पानी को पाइपलाइन के जरिए सौराष्ट्र के जल-संकट वाले इलाकों के 115 प्रमुख जलाशयों तक पहुंचाना है। केंद्र सरकार के आधिकारिक विवरण के अनुसार परियोजना के प्रथम चरण की लिंक-1, लिंक-2 और लिंक-3 का उद्घाटन क्रमशः अगस्त 2016, अप्रैल 2017 और जून 2017 में हुआ।
योजना को चार मुख्य लिंक और कई पैकेजों में बनाया गया। गुजरात सरकार के जल संसाधन विभाग के अनुसार इसका उद्देश्य सौराष्ट्र के 11 जिलों में जल उपलब्धता बढ़ाना है। हालिया सरकारी दस्तावेज में बताया गया है कि सौनी के तहत 115 बांधों को जोड़ने के लिए लगभग 1,371 किलोमीटर का जल अंतरण ढांचा तैयार किया जा चुका है।
जुलाई 2023 में एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बताया था कि सौनी योजना गुजरात में एक अहम पहल रही है, जिसमें पिछले 7 वर्षों में 1203 किमी पाइपलाइन बिछाई गई हैं। उनके मुताबिक इस पर 18,563 करोड़ रुपए खर्च हो चुके थे और परियोजना 95 प्रतिशत पूरी बताई गई थी। इसके बाद भी 2026-27 के गुजरात बजट में योजना के लिए 473 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
क्यों नहीं छोड़ा जा रहा है पानी?
दरअसल सौनी योजना में प्रावधान है कि नर्मदा में अतिरिक्त पानी ही सौनी योजना के तहत बिछाई गई पाइप लाइन के जरिये सौराष्ट्र के बांधों तक पहुंचाया जाएगा। केंद्रीय जल आयोग के ताजा बुलेटिन के मुताबिक 3 सितंबर 2026 को नर्मदा बेसिन में 17.777 अरब घन मीटर पानी था, जो सामान्य भंडारण 16.748 अरब घन मीटर से 6.13 प्रतिशत अधिक है, लेकिन पिछले वर्ष इसी को पानी का भंडारण 19.864 अरब घन मीटर पानी था। यानी इस साल नर्मदा बेसिन में पिछले वर्ष की तुलना में 2.087 अरब घन मीटर, यानी करीब 10.5 प्रतिशत कम पानी है।
हालांकि सामान्य से अधिक पानी होने के बावजूद सौराष्ट्र के सूखे जलाशयों के लिए सौनी के जरिए पानी छोड़ने पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि मामला बिगड़ता देख फिलहाल राज्य सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं। 30 अगस्त 2026 को सरकार ने मच्छु-2 जलाशय से साउनी योजना की लिंक-1 के जरिए जामनगर और देवभूमि द्वारका के लिए 600 क्यूसेक पानी उठाने की मंजूरी दी, लेकिन सरकार ने कहा कि इस पानी में पहले पेयजल जरूरत पूरी की जाएगी और उसके बाद बचा पानी खेती व सिंचाई के लिए दिया जाएगा।
इसके अलावा, 2 सितंबर को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कम बारिश वाले जिलों की स्थिति की समीक्षा की गई। कच्छ, जामनगर और देवभूमि द्वारका समेत प्रभावित जिलों में पेयजल और चारे की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। संबंधित विभागों और प्रभारी मंत्रियों को जमीन पर स्थिति की लगातार समीक्षा करने को कहा गया है।
लेकिन अब तक सरकार ने सिंचाई के लिए ठोस इंतजाम नहीं किए हैं। जिस कारण किसानों की उम्मीद केवल बारिश पर टिकी है।