कृषि प्रधान देश भारत में कृषि अनुसंधान पर खर्च धीरे-धीरे कम से कमतर हो रहा है। वित्त वर्ष 2021-22 में जहां कुल सरकारी बजट में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग की हिस्सेदारी 0.24 प्रतिशत थी, वहीं 2026-27 में यह हिस्सेदारी घट कर 0.19 प्रतिशत रह गई है।
संसद की स्थायी समिति (कृषि, पशुपालन एवं खाद्य प्रसंस्करण) ने कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के बजट आवंटन पर गंभीर चिंता जताई है। यह स्थिति तब है, जब कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग ने 2047 तक उत्पादन को 2.1 बिलियन टन तक ले जाने के अत्यधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखे हैं।
समिति के अनुसार, विभाग ने जहां 11,427 करोड़ रुपए की मांग की थी, जबकि वित्त मंत्रालय ने मात्र 9,967 करोड़ रुपए का आवंटन किया।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि लगातार कम बजट मिलने के कारण विभाग को अपने अनुसंधान एवं विकास कार्यों को आगे के लिए टालना पड़ रहा है। इससे कृषि क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी विकास प्रभावित होने की आशंका है।
समिति ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि कृषि अनुसंधान पर खर्च देश के कृषि जीडीपी का केवल 0.5 से 0.6 प्रतिशत है, जो वैश्विक औसत (करीब 0.93 प्रतिशत) से काफी कम है।
समिति ने 'पूंजीगत खंड' के तहत फंड के भारी कम उपयोग पर गंभीर आपत्ति जताई है। उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष 2025-26 में जनवरी तक आवंटित बजट का केवल 23.89 प्रतशित ही खर्च हो सका था। बताया गया कि इसका मुख्य कारण केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) जैसे संगठनों द्वारा समय पर बिल जमा न करना और प्रशासनिक देरी रहा।
खस्ता हाल कृषि विज्ञान केंद्र
देश में कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में जिला स्तर पर खुले कृषि विज्ञान केंद्रों का खासा महत्व रहा है।
देश में कृषि तकनीक के प्रसार और किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए स्थापित कृषि विज्ञान केंद्र अब 638 जिलों में 731 कृषि विज्ञान केंद्र कार्यरत हैं। जबकि अभी नए जिलों में 121 नए कृषि विज्ञान केंद्र खोले जाने हैं।
खास बात यह है कि जब संसदीय समिति ने विभाग से पूछा कि हर जिले में कम से कम एक कृषि विज्ञान केंद्र क्यों नहीं खोला गया तो विभाग ने जवाब दिया कि देश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित करने की योजना के सामने कई व्यावहारिक बाधाएं हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया कि अनुमतियां, वित्तीय संसाधन और पर्याप्त भूमि की उपलब्धता इस दिशा में प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं। विभाग के अनुसार, हर जिले में खोलने के लिए स्थापना व्यय अनुमोदन समिति (सीईई) से अनुमति आवश्यक होती है।
इसके अलावा, परियोजना के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रावधान और कम से कम 20 हेक्टेयर एकसाथ उपयुक्त भूमि की उपलब्धता जरूरी है, जो कई जिलों में आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती।
एक ओर जहां देश में नए कृषि विज्ञान केंद्र नहीं खुल रहे हैं, वहीं मौजूदा कृषि विज्ञान केंद्रों में स्टाफ की कमी बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक कृषि विज्ञान केंद्रों में लगभग 29 प्रतिशत पद रिक्त हैं।
विभाग का जवाब
कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के बजट में कटौती को लेकर उठे सवालों पर विभाग ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कम आवंटन का मुख्य कारण केंद्रीय योजनाओं की मंजूरी का लंबित होना है।
मंत्रालय के अनुसार, मंजूरी मिलने के बाद बजट में संशोधन संभव है। संसदीय समिति के समक्ष मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सीमित संसाधनों के बावजूद योजनाओं और कार्यक्रमों को प्राथमिकता के आधार पर संचालित किया जाएगा। हालांकि, उसने यह भी स्वीकार किया कि कम बजट के कारण कुछ कम महत्वपूर्ण योजनाओं को फिलहाल टालना पड़ सकता है।
समिति के अनुसार, यदि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना है, तो कृषि क्षेत्र में रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर निवेश को कृषि-जीडीपी के कम से कम 1 प्रतिशत तक बढ़ाना होगा और कृषि विज्ञान केंद्र जैसे प्रसार तंत्र को रिक्त पदों को भरकर और बुनियादी ढांचे को मजबूत करके पुनर्जीवित करना होगा