सस्ती बिजली की मांग कर रहे बनारस के बुनकरों की सौर ऊर्जा से बढ़ी उम्मीद

लोकसभा चुनाव में उनकी मांग क्या है, इस पर वह कहते हैं, “पहले हमें बिजली बिल पर अच्छी सब्सिडी मिलती थी। सरकार हमें सस्ती दरों और फ्लैट रेट पर बिजली दे।
5 पावरलूम के साथ काम कर रहे बुनकर मोहम्मद शरीफ सस्ती दरों पर बिजली देने की मांग कर रहे हैं।  फोटो: वर्षा सिंह
5 पावरलूम के साथ काम कर रहे बुनकर मोहम्मद शरीफ सस्ती दरों पर बिजली देने की मांग कर रहे हैं। फोटो: वर्षा सिंह

दुनिया की सबसे खूबसूरत, चमकीली, महंगी, सोने-चांदी के धागों से बुनी बनारसी साड़ियां बनाने वाले बुनकरों के इलाकों में स्वच्छता अभियानों के झाड़ू अब तक नहीं पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 24 घंटे बिजली आपूर्ति वाले संसदीय क्षेत्र के इस हिस्से में बिजली भी कट-कट कर आती है। बनारसी साड़ियों का समृद्ध इतिहास संभालने वाले बुनकर आज भी बिजली की दरों और अपनी आजीविका के सवाल से जूझ रहे हैं। सौर ऊर्जा छोटे बुनकरों के लिए राहत लेकर आई है। 

ये वाराणसी के लोहता थाना क्षेत्र का कोटवा गांव है। “टसर बनरासी” फर्म चला रहे बुनकर मोहम्मद शरीफ़ के पास 5 पावरलूम हैं। जब हम इनसे मिलने पहुंचे तो तीन मशीनें बंद थीं, एक पर काम चल रहा है और एक करघे पर धागा चढ़ाया जा रहा है। शरीफ़ कहते हैं “पूरे बाज़ार में मंदी है। सारे बड़े ऑर्डर सूरत और बैंगलोर जा रहे हैं। बाजार में मांग कम होने पर हम कपड़ा उत्पादन कम देते हैं। फिर कारीगरों को काम भी नहीं मिल पाता”। 

लोकसभा चुनाव में उनकी मांग क्या है, इस पर वह कहते हैं, “पहले हमें बिजली बिल पर अच्छी सब्सिडी मिलती थी। सरकार हमें सस्ती दरों और फ्लैट रेट पर बिजली दे। हम बिजली बिल भरने की स्थिति में नहीं हैं। हमारे जैसे छोटे बुनकरों पर 2-3 लाख रुपए तक बिजली बिल बकाया है”। 

7 वर्ष की उम्र से बुनकरी कर रहे शोएब कहते हैं कि अब इस पेशे में स्थायी रोजगार नहीं रह गया है। फोटो: वर्षा सिंह

करघे पर पूरी तल्लीनता के साथ धागा चढ़ा रहे 26 वर्षीय कारीगर शोएब ऊर्फ राजू ने 7 वर्ष की उम्र में बुनकरी का प्रशिक्षण लेना शुरू किया था। 10 वर्ष की उम्र से वे यह काम कर रहे हैं। पढ़ने के शौकीन रहे शोएब कहते हैं “बनारस में बुनकरी अब स्थायी काम नहीं रह गया है। आज काम मिला है, कल नहीं मिलेगा। धागा चढ़ाने पर 500 रुपए तक मेहनताना मिलता है। किस्मत अच्छी रहे और पूरे महीने काम मिले तो 15-20 हजार रुपए तक कमाई होगी”। 

“पहले लोग मुझे दो रोज पहले ही मुझे बता देते थे कि धागा खत्म होने वाला है, आकर लगा देना। अब मैं बुनकरों के पास जा-जाकर पूछता हूं कि धागा चढ़ाना है क्या”, शोएब की 4 बहनें और 3 भाई बुनकरी पेशे में हैं। मां साड़ियों की फिनिशिंग के लिए धागे की कटिंग करती हैं। 

बिजली दरें बढ़ने से कपड़ा उत्पादन पर लागत बढ़ गई है। बुनकर अनिल कुमार पटेल भी यही शिकायत करते हैं। फोटो: वर्षा सिंह

बुनकर नाराज़ क्यों

उत्तर प्रदेश भारत का तीसरा सबसे बड़ा कपड़ा उत्पादक राज्य है। जो राष्ट्रीय उत्पादन का 13.24% उत्पादन करता है। वर्ष 2021-22 में प्रदेश से कपड़ा और परिधान का निर्यात लगभग 20,500 करोड़ रुपये का था। इसमें कालीन और अन्य टेक्स्टाइल फ्लोर कवर शामिल हैं। 

वाराणसी में वस्त्र बुनकर संघ से करीब 600 बुनकर जुड़े हैं। इसके अध्यक्ष और 30 पावरलूम के साथ कार्य कर रहे राकेशकांत राय कहते हैं “कपड़ा बनने से पहले और बाद की प्रक्रिया के लिए राज्य में कोई टेक्सटाइल इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है। कपड़े के लिए धागे हम कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात से मंगाते हैं और माल तैयार करने का ऑर्डर भी दूसरे राज्यों से मिलता है। जिससे ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ जाती है। यहां हमें सिर्फ बिजली सस्ती मिलती थी। जिससे कुछ लाभ कमाते थे। बिजली महंगी होने से वो लाभ भी कम हो गया”। 

“बाज़ार की कड़ी प्रतिस्पर्धा में उत्तर प्रदेश के बुनकर कैसे टिकेंगे। यहां हम जो सबसे सस्ता कपड़ा बनाते हैं उसकी कुल लागत 38 रुपया प्रति मीटर आती है जबकि सूरत और बॉम्बे 37 रुपए में ऑर्डर तैयार करता है तो खरीददार हमारे पास क्यों आएगा?”, राय बताते हैं कि 2019 में बिजली बिल नियमों में बदलाव के बाद से ये समस्या शुरू हुई है। “मैंने अपने ज्यादातर लूम बंद कर दिए हैं। इससे कारीगरों को काम मिलना भी बंद हो गया है। बुनकर अपना रोजगार चलाने के साथ-साथ रोजगार देने वाला समुदाय भी है लेकिन सरकार नहीं चाहती की हम अपना व्यवसाय बढ़ाएं। यही सरकार निवेशकों को आर्किषत करने के लिए निवेशक सम्मेलन करती है”। 

बिजली दरों में बदलाव

वर्ष 2006 में 0.5 हॉर्सपावर (एचपी) वाले 60 रीड स्पेस (कंघी) के पावरलूम के लिए 65 रुपए/लूम की दर, 60 से अधिक रीड स्पेस के लूम के लिए 130 रुपए/लूम प्रति माह की दर से बिजली दी जाती थी। ग्रामीण क्षेत्रों में ये दरें 37.50 रुपए और 75 रुपए थी। 

4 दिसंबर 2019 को नई योजना लागू की गई। जिसमें 1 एचपी के पावरलूम बुनकरों को 240 यूनिट और 0.5 एचपी पावरलूम बुनकरों को 120 यूनिट तक 3.50 रुपए दर तय की गई।  इससे अधिक बिजली खर्च होने पर कमर्शियल दर पर 9-10 रुपए/यूनिट तक भुगतान करना होता था। 

1 अप्रैल 2023 को अटल बिहारी वाजपेयी पावरलूम बुनकर विद्युत फ्लैट रेट योजना आई। इसमें 5 किलोवाट तक, 0.50 एचपी के शहरी बुनकरों को 60 रीड स्पेस लूम पर 400 रुपए/माह की दर से बिजली दरें तय की गईं। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ये दरें 300 रुपए/माह रखी गईं। 

5 किलोवाट तक 1 एचपी लूम के शहरी बुनकरों के लिए ये दरें 800 रुपए/माह और ग्रामीण क्षेत्र में 600 रुपए/माह तय हुई। 

5 किलोवाट से अधिक भार के बिजली कनेक्शन के लिए शहरी पावरलूम बुनकरों को 700 रुपए/माह/एचपी और अधिकतम सीमा 9,100 रुपए/कनेक्शन रखी गई। 

राकेशकांत राय कहते हैं पहले बिजली की लागत हमें 50 पैसा/मीटर पड़ती थी जो अब करीब 2-2.50 रुपये/मीटर हो गई है। हमारा मुनाफा सीधे तौर पर घट गया है। मैं जितना कमाऊं वो सारा बिजली का बिल जमा कर दूं। महंगाई बढ़ी, आप हमारे वर्ष 2006 वाले फ्लैट रेट को ही दोगुना-तीन गुना कर लेते लेकिन ये व्यवस्था खत्म नहीं करनी थी। अब बुनकर का सारा ध्यान बिजली खर्च पर रहता है। अगर हम सूरत या भिवंडी से 25 पैसा/मीटर महंगा देते हैं तो हमारे ऑर्डर रद्द हो जाते हैं। 

वाराणसी वस्त्र बुनकर संघ ने वर्ष 2006 और 2023 में बिजली दरों में बदलाव का ये चार्ट तैयार किया। फोटो: वर्षा सिंह

वह डाउन टु अर्थ के साथ बिल चार्ट शेयर करते हैं। जिसके मुताबिक 2019 तक दो लूम पर जो बिल करीब 1,100 रुपए आता था वो 2023 में बढ़कर 37,000 हो गया है। 

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में 5 किलोवाट भार और 0.5 हार्सपावर के 57,510 पावरलूम हैं। जबकि 1 हार्सपावर के 3,131 लूम हैं। वहीं शहरी क्षेत्र में 0.5 हार्सपावर के 1,76,066 और 1 हार्सपावर के 14,115 लूम हैं।

जबकि वाराणसी में करीब 30 हजार पावरलूम और 7-8 हजार हथकरघा बुनकर हैं। 

वाराणसी में हैंडलूम और टेक्सटाइल विभाग में सहायक आयुक्त अरुण कुमार कुरील कहते हैं कि सरकार ने छोटे बुनकरों को बिजली दरों में रियायत दी है। जो बुनकर इंडस्ट्री के तौर पर कार्य कर रहे हैं उन्हें ये छूट नहीं दी जा सकती। 

बीते वर्षों में बिजली दरों में बदलाव के विरोध में बनारस में गांव से लेकर शहर तक छोटे-बड़े बुनकरों ने विरोध प्रदर्शन किए और शासन को पत्र भेजे। 

बुनकर मोहम्मद शरीफ और अनिल कुमार पटेल ने 5 किलोवाट का रूफ़ टॉप सोलर प्लांट लगवाया।  फोटो: वर्षा सिंह

सौर ऊर्जा से राहत

बिजली दरों की बढ़ती मुश्किलों के बीच वाराणसी के कुछ बुनकरों ने रूफ टॉप सोलर प्लांट पर भरोसा जताया। वर्ष 2017 में द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (टेरी) ने सब्सिडी के साथ बुनकरों को बैट्री बैकअप वाले हाइब्रिड सोलर प्लांट से जोड़ना शुरू किया। वर्ष 2023 तक तकरीबन 500 बुनकर सोलर प्लांट लगवा चुके हैं। 

लोहता क्षेत्र के सरहरी गांव के बुनकर अनिल कुमार पटेल इनमें में से एक हैं। वह बताते हैं “मेरे पास दो पावरलूम हैं। बार-बार बिजली कटने से हमारा काम रुकता था लेकिन सोलर लगाने के बाद बिजली न रहने पर भी काम रुकता नहीं है। पहले जहां एक दिन में 2-3 मीटर कपड़ा बनाते थे, अब 6-7 मीटर कपड़ा बनाते हैं”। 

सोलर प्लांट लगाने के बाद पटेल का मार्च-अप्रैल का बिजली बिल 4,567 रुपए आया। बकाया रकम मिलाकर उन्हें करीब 11 हजार रुपए का भुगतान करना है। “इस महीने हमने 18 हजार रुपए का काम किया, बिजली बिल और कारीगरों को पैसे देने के बाद मेरे हाथ में कुछ नहीं बचेगा। ये स्थिति सोलर प्लांट लगाने के बाद है”। 

उत्तर प्रदेश सरकार भी मुख्यमंत्री बुनकर सौर ऊर्जा योजना लेकर आई है। जिसमें 5 से 25 किलोवाट प्लांट पर 50% सब्सिडी दी जा रही है। सहायक आयुक्त अरुण कुमार कुरील कहते हैं कि उन्हें अब तक इस योजना में बुनकरों की ओर से कोई आवेदन नहीं मिला है। इस पर जागरुकता लाने की जरूरत है। 

वाराणसी के छोटे-बड़े सभी बुनकर एक स्वर में बिजली बिल में छूट की मांग कर रहे हैं। वह निराशा जताते हैं कि इस स्थिति में कारीगर काम की तलाश में सूरत और भिवंडी की ओर पलायन कर रहे हैं।

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